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पंजाब स्टाफ सेलेक्शन बोर्ड ने “उचित प्रक्रिया के तहत” चुने स्टेनो-टाइपिस्ट जिन्हें बस टाइप करना नहीं आता

पंजाब सचिवालय के अधिकारी ने कई शिकायतें मिलने के बाद जब दोबारा टेस्ट लिया तो कुछ चयनचि उम्मीदवार टेस्ट में फेल हो गए।

मध्य प्रदेश के व्यापम, बिहार के बोर्ड और बीएसएससी परीक्षा में घोटालों के बाद अब पंजाब स्टाफ सेलेक्शन बोर्ड (पीएसएसबी) द्वारा की गयी “स्टेनो-टाइपिस्ट” की नियुक्ति संदेह के घेरे में है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार पीएसएसबी ने “उचित चयन प्रक्रिया” के द्वारा जिन उम्मीदवारों का “स्टेनो-टाइपिस्ट” के रूप में चयन को अंतिम मंजूरी दी थी उनमें से बहुतों के टाइपिंग और शार्ट हैंड नहीं आता था। यानी चयनित उम्मदीवारों के पास नौकरी के लिए जरूरी प्राथमिक योग्यता भी नहीं थी।

इन “स्टेनो-टाइपिस्ट” की नियुक्ति बोर्ड ने पिछले साल की थी। पीएसएसबी ने 30 से ज्यादा उम्मीदवारों को अंतिम चयन करके तीन बैच में पंजाब सिविल सचिवालय की विभिन्न शाखाओं में तैनाती के लिए भेजा था। सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी ने द ट्रिब्यून को बताया कि इन “स्टेनो-टाइपिस्ट” की कई शिकायतें मिलने के बाद उन्होंने चयनित उम्मीदवारों का टेस्ट लेने का फैसला लिया। अधिकारी ने बताया कि तीन चयनित “स्टेनो-टाइपिस्ट” आवश्यक गति से टाइप नहीं कर पा रहे थे और न ही वो दिए गए समय में शार्ट हैंड का इस्तेमाल करके लिख पाए।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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