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यूपी एसटीएफ ने गुरुवार को दिल्ली से सटे नोएडा में 3700 करोड़ की ठगी करने वाले ऑनलाइन ठग समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है

घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से मोटी कमाई का लालच दे सात लाख लोगों से 3700 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मामले में नोएडा के सेक्टर-63 से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने इनके दर्जन भर बैंक खातों में जमा 524 करोड़ रुपये भी जब्त कर लिए हैं। आरोपियों ने धोखाधड़ी की रकम से राजनीति और बॉलीबुड में अच्छी पकड़ बना ली थी।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किशनगंज पिलखुआ निवासी अनुभव मित्तल, कांति नगर मशूलीबडडा विशाखापटनम आन्ध्र प्रदेश निवासी श्रीधर प्रसाद और कमई बरसाना मथुरा निवासी महेश दयाल केरूप में हुई है। श्रीधर फिलहाल नोएडा के सेक्टर-53 बी-53 में रह रहा था। ये लोग सेक्टर-63 एफ-472 में एबलेज इन्फो सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी आईटी कंपनी चला रहे थे। ये लोग  socialtrade.biz के नाम से ऑनलाइन सोशल मीडिया पोर्टल बनाकर ठगी कर रहे थे। ग्रेटर नोएडा से बीटेक की पढ़ाई कर चुका अनुभव मित्तल इस फर्जी कंपनी का मालिक और पूरे फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड है। एमबीए कर चुका श्रीधर कंपनी का सीईओ है और महेश टेक्नीकल हेड के पद पर कार्यरत था। एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि कंपनी ने एक प्राइवेट कंपनी से 12 सर्वर किराए पर ले रखे हैं। ये सर्वर गाजियाबाद के राज नगर इलाके में मौजूद हैं।

सर्वर को सीज कर लिया गया है। लखनऊ फॉरेंसिक लैब के उप निदेशक डॉ. अरूण शर्मा और वरिष्ठ वैज्ञानिक सौरभ गुप्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम सर्वर और कंपनी से वैज्ञानिक साक्ष्य (साइंटिफिक एवीडेंस) एकत्र कर रही है। साथ ही ये टीम सर्वर और कंपनी के कंप्यूटरों से डिलीट किया गया डाटा भी रिकवर करेगी। कंपनी के सर्वर से अभी तक जो जानकारी मिली है उसके हिसाब से ये लोग अब तक सात लाख से ज्यादा लोगों से 3726 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। अब भी इनके खातों में 524 करोड़ रुपये जमा हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है।

एसएसपी ने बताया कि  इस खुलासे में एसटीएफ के एसपी डॉ.त्रिवेणी सिंह , राजीव नारायण मिश्रा और डीएसपी राजकुमार मिश्रा ने धोधाधड़ी का भंडाफो़ड़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरोपी, लोगों को चार स्कीम (5750 रुपये, 11500 रुपये, 28750 रुपये या 57500 रुपये) के तहत अपना सदस्य बनाते थे। इसके बाद उन्हें अपने सोशल मीडिया पोर्टल पर लॉग इन आईडी देते थे। लॉग इन के जरिए सदस्यों को स्कीम के हिसाब से 25, 50, 75 या 125 लिंक लाइक करने को दिए जाते थे। प्रत्येक लिंक पर लाइक करने के लिए सदस्यों को पांच रुपये का भुगतान किया जाता था। जबकि कंपनी एक रुपये खुद कमीशन के तौर पर रखती थी।

एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक के अनुसार वास्तविकता में कंपनी के पास ब्रांड या प्रोडक्ट प्रमोशन के लिए कोई कस्टमर ही नहीं है, जो लाइक कराने के एवज में कंपनी को पैसा देती। कंपनी लोगों से पैसा लेकर कुछ को उसी में से थोड़ी रकम वापस कर रही थी। ऐसे में बहुत से लोगों को पैसा वापस नहीं मिल रहा था। शुरूआती जांच में एसटीएफ को इस फर्जी कंपनी के सर्वर से ही एक लाख ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिसमें उनके पैसे न मिलने की बात कही गई है। कंपनी के खिलाफ नोएडा के फेज-तीन थाने में एक फरवरी 2017 को दिल्ली निवासी पूजा और ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर थाने में 31 जनवरी 2017 को दिनेश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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