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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से भारत विभाजन विभीषिका के संदर्भ में दो दिवसीय फिल्म प्रदर्शन आयोजन

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानन्द जोशी ने विभाजन के दौरान वीभिषिका को इतिहास का सबसे बड़ा दर्द बताते हुए कहा कि दुखद है कि आज तक उसे इतिहास ने ठीक से दर्ज नहीं किया।

राजेश तिवारी विशेष संवाददाता: दिल्ली, 12 अगस्त। केंद्रीय संसदीय कार्य एवं संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भारत विभाजन से प्रभावित लोगों के बारे में सही और सम्यक शोध की जरूरत बताई है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से भारत विभाजन विभीषिका के संदर्भ में दो दिवसीय फिल्म प्रदर्शन आयोजन के पहले दिन श्री मेघवाल ने कहा कि विभाजन एक समय सीमा तक ही प्रभावी नहीं रहा। हम जानते हैं कि 1947 में आजादी के साथ ही दो देश बन गये। इसके साथ यह याद रखने की जरूरत है कि 1940 में विभाजन की जो प्रक्रिया शुरू हुई, उसका दुष्परिणाम हम आज तक झेल रहे हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि तब बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई, बहुतों को अपनी स्थाई सम्पत्ति आदि से हाथ धोना पड़ा, जबकि एक बड़ी संख्या में महिलाओं की उनकी अस्मत पर भी बन आई। बाद की पीढ़ियां आज तक उस विभाजन का दर्द झेल रही हैं। अलग बात है कि तब कुछ लोगों ने अपने को शरणार्थी कहने पर तब के प्रधानमंत्री के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और खुद को पुरुषार्थी कहा। ऐसे लोगों ने अपने कार्य से इसे साबित भी किया है।
श्री मेघवाल ने कहा कि यह सवाल उठाए जा सकते हैं कि आजादी के 70 साल बाद विभाजन विभीषिका दिवस मनाने का क्या मतलब है। मंत्री ने जवाब में जोड़ा कि फिर से देश में अलगाववादी ताकतें वैसी हिम्मत नहीं करें, इसलिए उस इतिहास को याद रखना जरूरी है। मंत्री ने आयोजन में उपस्थित गायिका और अभिनेत्री सलमा आगा को सम्मानित भी किया।
प्रारम्भ में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानन्द जोशी ने विभाजन के दौरान वीभिषिका को इतिहास का सबसे बड़ा दर्द बताते हुए कहा कि दुखद है कि आज तक उसे इतिहास ने ठीक से दर्ज नहीं किया। डॉ. जोशी ने इस बात पर संतोष जताया कि युवा पीढ़ी इसे जानना चाहती है। इस मौके पर विभाजन के संदर्भ में बनी फिल्मों को डॉ. जोशी ने उदाहरण बताया। इंदिरा गांधी कला केंद्र के मीडिया नियंत्रक अनुराग पुनेठा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया की सारी त्रासदियों का दस्तावेजीकरण तो हुआ परन्तु भारत विभाजन के प्रभाव का सही आकलन नहीं हो सका। आयोजन के मंच पर कला केंद्र की निदेशक (प्रशासन) डॉ. प्रियंका मिश्र भी मौजूद थीं। दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन विभाजन के संदर्भ में बनी फिल्मों ‘विभाजन विभीषिका’, ‘असमर्थ’, ‘डेरे तूं दिल्ली’, ‘फेडेड मेमोरीज’ के अलावा फीचर फिल्म ‘पिंजर’ दिखाई गई।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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