उत्तर प्रदेश

राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने शनिवार को विधानसभा चुनाव को लेकर दूसरी सूची जारी कर दी

लखनऊ । राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने शनिवार को विधानसभा चुनाव को लेकर दूसरी सूची जारी कर दी। इस सूची में 31 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। इसमें 8 महिला और 7 मुस्लिम प्रत्याशी शामिल हैं।

इसके तहत पार्टी ने कैराना से अनिल चौहान, थाना भवन से जावेद राव, चरथावल से सलमान जैदी, पुरकाजी से छोटी बेगम, मुजफ्फरनगर सिटी से पायल महेश्वरी, मीरापुर से पूर्व विधायक  मिथिलेश पाल, नजीबाबाद से लीना सिंघल, नहटौर से चन्दरपाल बाल्मीकि, बिजनौर से राहुल चौधरी, चांदपुर से एस.के. वर्मा पूर्व आईएएस, कांठ से अफाक खान, बिलारी से अनिल चौधरी, नौगावा सादात से अशफाक अली खान, हस्तिनापुर से कुसुम और किठौर से मतलूब गौड़ को टिकट दिया गया है।

इसके अलावा मुरादनगर से अजयपाल प्रमुख, हापुड़ से अंजू मुस्कान, गढ़मुक्तेश्वर से अय्यूब अली, दादरी से रविन्दर भाटी, जेवर से कमल शर्मा, सिकन्दराबाद से आशा यादव, बुलन्दशहर से श्री भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पण्डित , स्याना से ठाकुर सुनील सिंह, अनूपशहर से होशियार सिंह, शिकारपुर से मुकेश शर्मा, खैर से ओमपाल सिंह खटीक, बरौली से नीरज शर्मा, इग्लास से सुलेखा, सादाबाद से डॉ. अनिल चौधरी, मांट से योगेश नौहवार, एत्मादपुर से डॉ. प्रेम सिंह बघेल, आगरा ग्रामीण से नारायण सिंह सुमन, पीलीभीत से मंजीत सिंह, बरखेड़ा से स्वामी प्रवक्ता नन्द और बस्ती सदर से ऐश्वर्य राज सिंह को प्रत्याशी बनाया है।

इनमे कैराना से चुनाव घोषित अनिल चौहान भाजपा सांसद हुकुम सिंह के भतीजे है और पिछले विधानसभा में नाहिद हसन से 1070 वोट से चुनाव हार गए थे ,नजीबाबाद से लीना सिंघल भाजपा की चेयरमैन थी ,बुलंदशहर से श्री भगवान शर्मा उर्फ़ गुड्डू पंडित,मुकेश शर्मा और होशियार सिंह विधायक है जो टिकट न मिलने पर रालोद में शामिल हो गए है |चांदपुर से चुनाव लड़ रहे एस.के.वर्मा बिजनौर के जिलाधिकारी और मुरादाबाद के कमिश्नर रह चुके है |मुजफ्फरनगर शहर से प्रत्याशी पायल माहेश्वरी मैनपुरी जेल में बंद संजीव जीवा की पत्नी है

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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