उत्तर प्रदेश

योगी आदित्यनाथ ने शुरू की लॉकडाउन 4.0 की तैयारी, आगरा व मेरठ को कोई राहत नहीं

राजेश तिवारी विशेष संवाददाता लखनऊ: CM योगी के मुताबिक, यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है और वह नहीं चाहते कि कम्युनिटी स्प्रेडिंग हो. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन 4 में भी ज्यादा छूट देने में हमें कठिनाई महसूस हो रही है. जो लोग अन्य राज्यों और शहरों से आ रहे हैं, उनके लिए भी व्यवस्थाएं करना हमारी पहली प्राथमिकता है
अधिकारियों और मंत्रियों से राय लेने के बाद यूपी की तरफ से लॉकडाउन 4 में छूट का प्रस्ताव बनाकर पहले ही केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। बताया जा रहा है कि यूपी में कुछ शर्तों के साथ चुनिंदा छूट दी जा सकती है। वैसे बताया जा रहा है जिल शहरों में सबसे ज्यादा कोरोना का कहर है वहां कोई छूट नहीं मिलने वाली है। इसमें मेरठ और आगरा का नाम सबसे ऊपर है। आगरा में तो कोरोना मरीजों की संख्या 800 से ज्यादा हो चुकी है। वैसे अब हर कोई लॉकडाउन 4 के बारे में जानने को बेताब है कि सोमवार से क्या क्या छूट मिलने जा रहा है।

सख्ती के दिए थे संकेत :
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए संकेत दिए थे कि हो सकता है यूपी में लॉकडाउन 4 के दौरान ज्यादा छूट ना मिले। इसके पीछे का तर्क देते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश में बहुत सारे लोग बाहर से आए हैं। यह हमारे लिए चुनौतीपूर्ण समय है। हम नहीं चाहते कि कम्युनिटी स्प्रेडिंग हो। सीएम योगी ने भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों को न खोलने का संकेत दिया। कहा कि ऐसे एरिया वाले प्रतिष्ठानों को अभी हम खोल दें, ऐसा मुझे नहीं लगता। मुख्यमंत्री ने कहा कि जितने श्रमिक लोग आये हैं, यह हमारे अपने हैं, हमारी ताकत है। इसमें किसी का भी अनादर न हो।
सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव में ये कहा गया :
– लॉकडाउन जारी रहे लेकिन शर्तों के साथ छूट मिले।
– आर्थिक गतिविधि शुरू होने का रोडमैप तैयार किया जाए।
-हॉटस्पाॉट के बाहर की दुकानें खुलें।
– मिठाई की दुकानों से हो  हाेम डिलीवरी।
– मॉल ,सिनेमाघर स्कूल रहे बंद रहे।
– जरूरी चीजों के अलावा अन्य दुकानें भी खुले।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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