उत्तर प्रदेश

देशव्यापी लाकाउन के दौरान विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी कामगारों छात्रों एवं अन्य लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाने के दृष्टिगत कोरोना संक्रमण प्रसार को रोकने के लिए यूनिसेफ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से जारी की मार्गदर्शिका, जिसमें प्रवासी कामगारों के लिए होम कवारनटाइन के दौरान जरूरी सावधानियां एवं कोरोना से बचाव को लेकर विशेष वर्गों के लोगों के लिए सावधानी इत्यादि के विषय में विस्तार से जानकारी उपलब्ध

 

शहजाद अहमद रिहान उप संपादक ( SBT24.TV)
जिलाधिकारी रमाकांत पांडे ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण हुए देशव्यापी लाकाउन में दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी कामगारों छात्रों एवं अन्य लोगों को उन्हें सुरक्षित अपने घर पहुंचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अपने अपने राज्य लौटाए जाने के निर्णय के क्रम में कई स्तर पर व्यवस्थाएं की गई है, जिनमें उनके आवाजाही के लिए स्पेशल ट्रेन सहित अपने राज्य पहुंचने पर कवारनटाइन की सुविधा भी शामिल हंै। कोरोना संक्रमण के इस दौर में भारी संख्या में लोगों के घर वापसी पर कोरोना संक्रमण प्रसार को रोकने की भी चुनौती सरकार के सामने मौजूद है। उन्होंने बताया कि इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए यूनिसेफ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त रूप से मार्गदर्शिका जारी की है, जिसमें प्रवासी कामगारों के लिए होम कवारनटाइन के दौरान जरूरी सावधानियां एवं कोरोना से बचाव को लेकर विशेष वर्गों के लोगों के लिए सावधानी इत्यादि के विषय में विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
जिलाधिकारी रमाकांत पांडे ने बताया कि प्रवासी कामगारों के घर वापसी पर कुछ प्रतिबंध प्रोटोकॉल बनाए गए हैं, जिसमें बाहर से घर लौटने पर सभी प्रवासियों का जिला प्रशासन द्वारा पंजीकरण एवं स्क्रीनिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन प्रवासियों में कोविड- 2019 के लक्षण मिलेंगे उन्हें कुछ विशेष प्रोटोकाल के अनुपालन करने होंगे जबकि  जिन प्रवासियों मैं कोविड-19 के लक्षण नहीं भी पाए जाते हंै, तो उन्हें भी कुछ सावधानियों का अनुपालन करना अनिवार्य होगा। कोविड-19 के लक्षण पाए जाने वाले प्रवासियों को सरकार द्वारा प्रावधान कोरांटाइन फैसिलिटी केंद्रों में रखा जाएगा  क्वॉरेंटाइन फैसिलिटी में कोविड-19 की जांच होगी जांच में संक्रमण पाए जाने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा तथा जांच में संक्रमण नहीं पाए जाने पर 7 दिन क्वॉरेंटाइन में रखकर दोबारा जांच की जाएगी तथा 7 दिन के बाद भी ना पाए जाने पर उन्हें घर भेज दिया जाएगा, जहां उन्हें खुद को 14 दिन होम कोरांटाइन मैं रहना होगा। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के लक्षण नहीं पाए जाने पर प्रवासी को घर भेज दिया जाएगा, उन्हें भी घर में खुद को 21 दिन क्वॉरेंटाइन में रहना होगा। होम कोरांटाइन के दौरान यदि किसी को खांसी, बुखार या सांस लेने में कोई परेशानी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आशा या सरकार की हेल्पलाइन नंबर 18001805145 पर संपर्क करने करना सुनिश्चित करें ताकि उनके उपचार की समुचित व्यवस्था की जा सके।
जिलाधिकारी श्री पांडे ने बताया कि होम क्वॉरेंटाइन किए गए प्रवासी सावधानी बरतकर संक्रमण प्रसार रोक सकते हैं इसके लिए मार्गदर्शिका में जरूरी जानकारी दी गई है जिसमें घर पहुंचते ही 21 दिन होम क्वॉरेंटाइन में रहें इस दौरान अलग कमरे में ही रहें कवारनटाइन में रहते हुए अनिवार्य रूप से  मास्क, गमछा, दुपट्टे से मुंह तथा नाक को ढक कर रखें। उन्होंने बताया कि  मास्क, गमछा, दुपट्टे को साबुन एवं गर्म पानी से धोकर धूप में सुखाएं, सिर्फ एक बार के उपयोग के लिए बने मास्क का दोबारा इस्तेमाल ना करें, हाथों को साफ पानी एवं साबुन से बार-बार धोते रहें, किसी से भी हाथ मिलाने से परहेज करें, घर का सामान जैसे बर्तन, पानी का गिलास,  बिस्तर, तौलिया तथा अन्य उपयोग की जाने वाली चीजों को घर के दूसरे सदस्य के साथ साझा ना करें, संक्रमित व्यक्ति के लिए अलग से थाली रखें एवं उसे अलग से गर्म पानी से अच्छी तरह धोएं अपने मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप अपलोड करें और उसका प्रयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी अन्य व्यक्ति का प्रवेश अपने घर में ना होने दें आपको आपके परिवार के किसी भी सदस्य में यदि कोविड- 19 के लक्षण दिखाई देते हैं तो इसकी सूचना तत्काल आशा को दें और अपने घर से केवल एक व्यक्ति ही जरूरी सामानों की खरीदारी के लिए घर से बाहर जाए। घर से बाहर निकलते समय मास्क, गमछा, दुपट्टा का प्रयोग करें, वापस लौटने पर हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार किए जाने वाले उपायों को अपना कर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है तथा अपने घर के सदस्यों को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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