बॉलीवुड और मनोरंजन

रवीना टंडन के सपोर्ट में उतरा ये NGO, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व विवाद में किया एक्ट्रेस का बचाव

Raveena Tandon Tiger Reserve Controversy: मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने को लेकर बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन (Raveena Tandon) विवादों के घेरे में आ गई हैं. सतपुड़ा नेशनल पार्क के चूरना जंगल में हाल ही में रवीना टंडन घूमने के लिए गई हुईं थीं. ऐसे में वाहन संरक्षित इलाके से बाहर वाहन ले जाकर टाइगर के करीब से फोटो और वीडियो को खींचने की वजह से रवीना की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. ऐसे में वाइल्डलेंस इको फाउंडेशन नामक एनजीओ ने रवीना टंडन का बचाव किया है.

रवीना टंडन के बचाव में उतरा ये समूह

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व विवाद के रवीना टंडन का नाम इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है. इस बीच गैर सरकारी संगठन वाइल्डलेंस इको फाउंडेशन एनजीओ रवीना टंडन के सपोर्ट में सामने आया है. इस एनजीओ ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर हाल ही में एक ट्वीट किया है. इस ट्वीट में इस समूह ने लिखा है- वाहन का टाइगर के करीब होना वास्तव में खामियों से भरा है, जिप्सी एक अधिकृत गाइड और ड्राइवर की ओर से तय सड़कों  पर चलती हैं. टाइगर आजाद रूप से चलता है और एक प्रशिक्षित ड्राइवर बाघ की आचानक से की गई प्रतिक्रिया पर अपना रिएक्शन नहीं दे सकता है.जो उसे उत्तेजित करता है. इस एनजीओ के इस ट्वीट को बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस रवीना टंडन ने रीट्वीट किया है और थैंक्यू बोला है. 

क्यों छिड़ा रवीना टंडन के नाम पर विवाद

जंगल सफारी के दौरान बीते 25 नवंबर को रवीना टंडन (Raveena Tandon) मध्य प्रदेश के सतपुड़ा के टाइगर रिजर्व में पहुंचीं. इस बीच रवीना टंडन ने घूरना के जंगल में टाइगर के करीब वाहन के जरिए जाकर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की है. इस मौके के फोटो-वीडियो को रवीना ने सोशल मीडिया पर शेयर किया. इसके बाद पाया गया कि टाइगर के इतने करीब जाकर प्रतिबंधित टाइगर रोड पर वाहन ले जाना और फोटो खींचने की वजह से रवीना टंडन के नाम पर विवाद गर्मा गया है. बता दें कि एसटीआर के मुताबिक एक तय और उचित दूरी से ही वन्य जीवों को देखा और उनकी तस्वीरें क्लिक की जा सकती हैं.

यह भी पढ़ें- ‘मेरे हाथ में पिस्टल होती तो मैं उसे गोली मार देता’ जानें नादव लैपिड को लेकर किसने कही ये बात

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button