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लाॅकडाउन: जब नाई की दुकान खुलें तो वहां जाने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

राजेश तिवारी विशेष संवाददाता लखनऊ 
लखनऊ. लॉकडाउन के दौरान लोगों से एक कॉमन शिकायत सामने आ रही है और वह है नाई की दुकानों का ना खुलना। लोगों के बाल लंबे हो रहे हैं और गर्मी के मौसम में इनका न कट पाना उन्हें और परेशान कर रहा है। लॉकडाउन के दौरान कुछ लोग एक्सपेरिमेंट कर खुद ही केश काटने में जुट गए, लेकिन अधिकांश लोगों ने ऐसा रिस्क नहीं लिया। उन्हें उम्मीद है कि आगामी दिनों में हेयर सलून खुलेंगे और वह अपने केशों को कटवा सकेंगे। लॉकडाउन-3 खत्म होने के बाद अब लॉकडाउन-4 लागू करने की तैयारी है, और इसमें कुछ और छूट भी मिल सकती हैं। कुछ और दुकानें भी खुलेंगी जिनमें हेयर सैलून शामिल हो सकते हैं। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा भी नाई की दुकानों और हेयर सैलून से ही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बाल कटवाने के क्या नियम होंगे और कैसे इनकी दुकानें चलेंगी, इस संबंध में लखनऊ शहर के एक नामी हेयर कटिंग सैलून के मालिक जफर अहमह ने बताया कि यूरोप और जर्मनी की तरह भारत में बड़ी सावधानी के साथ हेयर सैलून खुलेंगे। देश के हेयर कटिंग सैलून और इनसे जुड़ी एसोसिएशन ने कुछ नियम बनाए हैं जल्द ही इन्हें लागू किया जाएगा।
तो अब कैसे होंगे हेयर कटिंग सैलून के नियम व बदलाव, जानें- – ग्राहकों के लिए कोई वेटिंग एरिया नहीं होगी – सैलून के वेटिंग रूम में कोई पत्रिकाएं और अखबार नहीं होगें – किसी भी तरह के सैलून में ड्राई कट नहीं होगा – सैलून में आने वाले ग्राहकों के बीच कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी होगी – सैलून में बाल सुखाने की मशीनों का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद होगा – बाल धोते और काटते समय बैक्टीरिया से बचने के लिए दस्ताने पहनने होंगे – कस्टमर के बाल कटवाते वक्त मास्क पहनना पड़ेगा
– बाल काटते समय ग्राहकों से दीन-दुनिया की चर्चा या गप्पें नहीं होंगी – आमने-सामने कोई बातचीत नहीं होगी, सीसे में देखते ही बात होगी – बाल ख़ुद ही काटने को बढ़ावा दिया जाएगा – कुछ ही घरों में बालों को कलर करने की सलाह दी जाएगी – बाल काटने से पहले हर चीज़ को संक्रमित रहित करना होगा – सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा – हर सैलून मालिक को अपने ग्राहकों के नाम दर्ज करने होंगे – ऐसा इसलिए ताकि कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जा सके
तो जब नाई की दुकान खुलें तो वहां जाने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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