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मानहानि केस से पहले जब नोरा फतेही के डांस की मुरीद हुई थीं जैकलीन फर्नांडीस, पढ़ें पूरी खबर

Jacqueline Fernandez Praised Nora Fatehi: बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही और जैकलीन फर्नांडीज का नाम इन दिनों काफी सुर्खियों में हैं. 200 करोड़ की ठगी वाले मामले में नाम आने के बाद जैकलीन के खिलाफ नोरा ने मानहानी का मुकदमा किया है. कानूनी विवाद से पहले जैकलीन, कभी नोरा के बैली डांस की फैन हुआ करती थीं. 9 साल पहले जैकलीन और नोरा के बीच काफी अच्छे संबंध थे. 

भले ही आज जैकलीन फर्नांडीज और नोरा फतेही के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है लेकिन साल 2016 में नोरा अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत कर रही थीं, तो उन्होंने टैलेंट रियलिटी शो झलक दिखला जा 9 (Jhalak Dikhhla Jaa 9) में भाग लिया था. तब झलक दिखला जा शो की जज जैकलीन फर्नांडीज भी थीं. उस दौरान जैकलीन को नोरा का डांस बेहद पसंद आया था.

जैकलीन ने बांधे नोरा की तारीफों के पुल
नोरा झलक दिखला जा 9 की कंटेस्टेंट बनकर गई थीं, ऑडिशन में नोरा ने अपने बैली डांस से सबको इम्प्रेस कर दिया था. नोरा का डांस देख जैकलीन फर्नांडीज ने तारीफ करते हुए कहा, “हे भगवान! तुम सच में बहुत हॉट हो. सबसे हॉट परफॉर्मेंस था, आप एक अच्छी कलाकार हैं. आप बहुत मेहनती हैं और यह सच में दिखता है. आप बहुत आगे जाओगी और मैं वास्तव में इसके लिए एक्साइटेड हूं. घबराई हुई नोरा ने जवाब दिया, “इसका मतलब है कि आपसे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है.”

जैकलीन ने नोरा को कहा कैटरीना से बेहतर डांसर 
इतना ही नहीं इसी शो के बॉलीवुड स्पेशल एपिसोड में, नोरा ने ‘माशाअल्लाह’ गाने पर जबरदस्त बेली डांस किया था. ये गाना कैटरीना कैफ पर फिल्माया गया था लेकिन जैकलीन को नोरा का डांस ज्यादा अच्छ लगा और उन्होंने नोरा को ‘कैटरीना से बेहतर बेली डांसर’ बताया था. जैकलीन ने नोरा को स्टेज पर गले भी लगाया. नोरा शो तो जीत नहीं पाईं लेकिन इससे उन्हें बहुत पॉपुलैरिटी मिली थी. उसके बाद से नोरा बॉलीवुड में एक बेहतरीन डांसर के तौर पर इतनी हिट हुईं कि साल 2022 में नोरा झलक दिखला जा शो की जज बनकर कुर्सी पर बैठी थीं. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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