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WhatsApp ने बैन कर दिए 23 लाख अकाउंट, कारण जानकर आप भी कर लें सुधार

WhatsApp Account Ban: वॉट्सएप ने लाखों भारतीय यूजर्स के वॉट्सएप अकाउंट को बैन कर दिया है. वॉट्सएप ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि इंस्टेंट मैसेजिंग एप ने अक्टूबर, 2022 में 2.3 मिलियन (23 लाख) भारतीय अकाउंट को बैन कर दिया है. वॉट्सएप ने यह भी बताया है कि यूजर्स की रिपोर्ट आने से पहले ही इन 23 लाख अकाउंट्स में से आठ लाख से भी ज्यादा अकाउंट्स को प्रोएक्टवली बैन कर दिया गया था. आइए इस बारे में डिटेल में जानते हैं.

अकाउंट ब्लॉक की वजह

वॉट्सएप ने अपनी रिपोर्ट में अकाउंट्स को ब्लॉक करने की वजह बताते हुए कहा है कि इन अकाउंट्स के खिलाफ यूजर्स की तरफ से शिकायतें मिली हैं. इसके बाद, जांच में पाया गया कि अकाउंट्स ने वाट्सएप के नियम का उल्लंघन किया है. वॉट्सएप के ग्रीवेंस मैकेनिज्म (शिकायत तंत्र) से मिली यूजर्स की शिकायत पर ही इनपर बन लगाया गया है. ऐप को 701 शिकायतें मिलीं और उसने 34 खातों पर कार्रवाई हुई है.

वॉट्सएप के प्रवक्ता के अनुसार, IT Rule 2021 के आधार पर उन्होंने अक्टूबर, 2022 के महीने के लिए अपनी यूजर सेफ्टी रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट में यूजर्स की शिकायतों और वॉट्सएप की कार्रवाई के बारे में विस्तार में बताया गया है. इसके साथ ही, वॉट्सएप को दुरुपयोग से बचाने के लिए वॉट्सएप ने अपनी निवारक कार्रवाई की डिटेल भी दी  है. बता दें कि नए आईटी नियम 2021 के तहत कंपनियों को हर महीने कंप्लायंस रिपोर्ट देनी जरूरी है

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वाट्सएप को मिली इतनी शिकायतें

रिपोर्ट की मुताबिक, वॉट्सएप को भारत में अक्टूबर के महीने में 701 शिकायतें मिलीं थी. इनमें से कंपनी ने 34 अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई की. इन अकाउंट को कार्रवाई के बाद बैन कर दिया गया. वहीं, कुछ पहले से बैन अकाउंट को बहाल भी किया गया है. मिली शिकायतों में से कुछ अकाउंट्स की जांच की गई और इन्हे कार्रवाई’ के दायरे से बाहर पाया गया और बख्श दिया गया. यह पहली बार नहीं हुआ है कि वाट्सएप ने लाखों भारतीय अकाउंट बैन कर दिए हैं. इससे पहले भी वॉट्सएप ने देश में 26 लाख से ज्यादा अकाउंट बैन किए थे. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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