टैकनोलजी

NavIC: भारतीय स्मार्टफोन में होगा अब स्वदेशी GPS

NavIC GPS : देश में अगले साल जनवरी ( जनवरी 2023) से कहीं जाने के लिए आपके स्मार्टफोन को ‘नाविक’ रास्ता दिखाएगा. दरअसल, केंद्र सरकार ने सभी स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को अपने फोन को बाजार में उतारने से पहले फोन में स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक (NavIC) इंस्टॉल करने का आदेश जारी किया है. हालांकि सरकार की इस ‘आत्मनिर्भर भारत मुहिम से फोन निर्माताओं में खलबली मच चुकी है. निर्माता कह रहे हैं कि हम इस नेविगेशन सिस्टम के लिए हार्डवेयर में बदलाव करना पड़ेगा, जिससे स्मार्टफोन महंगे हो जाएंगे. इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, यह मुद्दा सैमसंग, शाओमी से लेकर एपल तक सभी प्रमुख स्मार्टफोन निर्माताओं ने सरकार के सामने रखा है.

स्मार्टफोन निर्माता जता चुके हैं आपत्ति

रिपोर्ट में बताया गया है कि स्मार्टफोन इंडस्ट्री से जुड़ी दो प्रमुख कंपनियों के अधिकारियों और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, नाविक को लेकर स्मार्टफोन निर्माता सरकार से आपत्ति जता चुके हैं. अगस्त और सितंबर में हुई प्राइवेट मीटिंग्स में एपल इंक (Apple Inc), शाओमी कॉर्प (Xiaomi Corp), सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी लिमिटेड (Samsung Electronics Co Ltd) व अन्य कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई थी.

इन कंपनियों के अनुसार, फोन को नाविक के अनुरूप बनाने के लिए एडवांस रिसर्च और प्रॉडक्शन कॉस्ट में ज्यादा बढ़ोतरी करनी होगी. कंपनियों का कहना है कि इन बदलाव के लिए ज्यादा टेस्टिंग क्लियरेंस की जरूरत पड़ेगी, जो 1 जनवरी की डेडलाइन के भीतर करने के चक्कर में पूरे व्यापार और पहले से प्लान किए जा चुके फोन लॉन्च को चौपट कर देगी.

स्मार्टफोन कंपनियों ने मांगा साल 2025 तक का समय

स्मार्टफोन कंपनियों ने इसके लिए फोन में आवश्यक बदलाव करने के लिए समय की मांग की है. कंपनियों ने सरकार से साल 2025 तक का समय देने को कहा है. अब सरकार इस पर अगले कुछ दिनों में निर्णायक फैसला सुना सकती है. बता दें, देर रात IT मंत्रालय ने ट्वीट कर स्पष्ट किया है कि नाविक को स्मार्टफोन्स का हिस्सा बनाए जाने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं हुई है. जितनी मीटिंग्स इसे लेकर हुई हैं, वे डिस्कशन के लिए की गई हैं. फिलहाल इस मुद्दे पर सभी हितधारकों के साथ चर्चा की जा रही है.

नाविक क्या है?

साल 2018 में भारत ने अपना स्वदेश निर्मित रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम पेश किया था, जिसे नाविक (Navigation with Indian Constellation) नाम मिला था. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक भाग है. इसके माध्यम से भारत सरकार विदेशी सिस्टम्स पर देश की निर्भरता कम करना चाहती है. सरकार का कहना है कि नाविक के द्वारा देश के अंदर ज्यादा सटीक नेविगेशन रिजल्ट मिल सकेंगे और इसका उपयोग अर्थव्यवस्था को लाभ देने के लिए किया जा सकेगा.

स्मार्टफोन निर्माताओं मिला यह आदेश

Reuters की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने कहा है कि चीन, यूरोपियन यूनियन, जापान और रूस भी अपना ग्लोबल या रीजनल नेविगेशन सिस्टम GPS के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके मुकाबले साल 2018 से अब तक नाविक का उपयोग देश में बेहद कम स्तर पर हुआ है.

रिपोर्ट में सरकारी व स्मार्टफोन इंडस्ट्री से जुड़े डॉक्युमेंट्स के हवाले से दावा किया गया है कि मोदी प्रशासन और अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी नाविक का इस्तेमाल बढ़ाना चाहते हैं. इसी कारण स्मार्टफोन निर्माताओं से हर नए फोन में GPS के साथ ही नाविक भी इंस्टॉल करने के लिए आदेश दिया गया है. आगे बताया गया कि ये नए फोन जनवरी, 2023 से बिकने के लिए बाजार में उतारे जा सकते हैं.

सैमसंग की आवाज थी सबसे बुलंद

Reuters के अनुसार, 2 सितंबर 2022 को टॉप स्मार्टफोन मेकर्स व चिपमेकर्स के साथ IT मंत्रालय व इसरो के अधिकारियों ने बंद कमरे में एक मीटिंग की थी. इस मीटिंग में सैमसंग के इंडिया हेड बीनू जॉर्ज (Samsung India Head Binu George) ने बेहद सख्त शब्दों में सरकार को उत्पादन लागत बढ़ने की चिंताओं पर चेतावनी दी. कंपनी ने इससे अपने 2024 तक में लॉन्च होने वाले फोन्स की प्लानिंग भी प्रभावित होने की बात कही. हालांकि इसरो ने सभी कंपनियों से टेक्नीकल सपोर्ट देने का वादा किया है.

ये भी पढ़ें-

Samsung One UI 5.0: इन स्मार्टफोन्स को जल्द मिलेगा Android 13 अपडेट, जानें डिटेल

WhatsApp Video Call: व्हाट्सऐप की तैयारी, वीडियो कॉल पर 32 लोग कर सकेंगे बातचीत

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button