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विजय देवरकोंडा की फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर हुआ बुरा हाल, पांचवें दिन किया इतना बिजनेस

Liger Box Office Collection Day 5: विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) और अनन्या पांडे (Ananya Panday) की फिल्म लाइगर (Liger) से फैंस को बहुत उम्मीद थी. ये पैन इंडिया फिल्म पहले ही हफ्ते फेल साबित हो गई है. विजय ने लाइगर से बॉलीवुड में कदम रखा है मगर उनका चार्म नहीं चल पाया है. उनकी मेगा बजट पैन इंडिया फिल्म फ्लॉप हो रही है. लाइगर की कमाई हर रोज घटती जा रही है. इस बड़े बजट की फिल्म के लिए 50 करोड़ का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल लग रहा है. लाइगर ने पहले दिन अच्छी कमाई की थी मगर उसके बाद से इसका बिजनेस गिरता जा रहा है. लाइगर का पांचवे दिन का कलेक्शन सामने आ गया है. कलेक्शन में भारी गिरावट देखकर कहा जा सकता है कि इस फिल्म के लिए कुछ दिन भी सिनेमाघरों पर टिकना मुश्किल हो जाएगा.

लाइगर को कई भाषाओं में रिलीज किया गया है मगर उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ है. विजय और अनन्या के साथ इस फिल्म में राम्या कृष्णन, रॉनित रॉय अहम किरदार निभाते नजर आए हैं. वहीं माइक टायसन का फिल्म में कैमियो है. लेजेंड बॉक्सर का कैमियो भी इस फिल्म को नहीं बचा पा रहा है.

पांचवे दिन किया इतना बिजनेस
रिपोर्ट्स की माने तो सोमवार को लाइगर के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मे भारी गिरावट आई है. फिल्म ने पांचवे दिन करीब 2.50 करोड़ का बिजनेस किया है. रविवार को भी फिल्म को इंडिया-पाकिस्तान के बीच हुए मैच की मार झेलनी पड़ी थी. मैच का भी विजय की फिल्म पर भारी असर पड़ा था.

बायकॉट का हुआ असर
लाइगर के रिलीज होने से पहले ही सोशल मीडिया पर इसके बायकॉट की मांग उठ गई थी. लोग इस फिल्म को बायकॉट करने की मांग कर रहे थे. जिसका असर साफ फिल्म के कलेक्शन पर देखने को मिला है. वहीं कुछ लोग कह रहे हैं विजय को इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू नहीं करना चाहिए था.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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