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UPSC Result 2018: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2018 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है।कनिष्क कटारिया ने परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया है। अक्षत जैन दूसरे स्थान पर और बिजनौर के जुनैद अहमद तीसरे स्थान पर रहे

UPSC Result 2018: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2018 का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। फाइनल मेरिट सितंबर-अक्टूबर, 2018 में आयोजित मुख्य परीक्षा और फरवरी-मार्च, 2019 में आयोजित इंटरव्यू में प्रदर्शन के आधार पर जारी की गई है। इस बार कुल 759 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। इनमें जनरल कैटेगरी के 361, ओबीसी के 209, एससी के 128 और एसटी के 61 उम्मीदवार शामिल हैं। कनिष्क कटारिया ने परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया है। अक्षत जैन दूसरे स्थान पर और जुनैद अहमद तीसरे स्थान पर रहे हैं। उम्मीदवार अपना रिजल्ट www.upsc.gov.in पर जाकर देख सकते हैं।

ये हैं टॉपरों की लिस्ट
1. कनिष्क कटारिया
2. अक्षत जैन
3. जुनैद अहमद
4. श्रवण कुमात
5. सृष्टि जयंत देशमुख
6. शुभम गुप्ता
7. कर्नाटी वरूणरेड्डी
8. वैशाली सिंह
9. गुंजन द्विवेदी
10. तन्मय वशिष्ठ शर्मा
UPSC सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू में फेल होने पर भी मिलेगी नौकरी
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से आयोजित कराई जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को पास कर साक्षात्कार तक पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी है। यूपीएससी के चेयरमैन अरविंद सक्सेना ने बीते दिनों भारत सरकार को यह प्रस्ताव दिया था कि वह अभ्यर्थी जो प्रशासनिक सेवा या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने के बाद साक्षात्कार तक पहुंच जाते हैं उन्हें सरकार के मंत्रालयों में आवश्यकतानुसार नियुक्त किया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार अगर सरकार यूपीएससी का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है तो उन लोगों को नौकरी मिल सकती है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में साक्षात्कार के दौरान छंट जाते हैं। यूपीएससी की सिफारिश है कि जैसा कि ये उम्मीदवार पहले से ही सख्त स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरते हैं, सरकार और अन्य संगठन उन्हें नौकरियों के लिए विचार कर सकते हैं। कहा गया है कि यूपीएससी सिविल सेवा के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा के तनाव को कम करने में मदद करेगा।

नगीना बिजनौर के रहने वाले यूपीएससी के तीसरे टॉपर जुनैद अहमद

तीसरे टॉपर जुनैद अहमद की कहानी जाने👇कामयाबी एक दिन क़दम ज़रूर चूमती है — यूपीएससी के तीसरे टॉपर जुनैद अहमद के बारे में बता दें कि जुनैद ने पांचवी कोशिश में ये कामयाबी हासिल की है. पिछले साल चौथी कोशिश में इन्होंने 352 रैंक हासिल किया था.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रेजिडेंशियल कोचिंग से तैयारी करने वाले जुनैद का ताल्लुक़ उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िला के नगीना क़स्बा से है. इनके पिता जावेद हुसैन पेशे से वकील हैं और मां आयश रज़ा होम मेकर हैं. इनकी दो बहनों में एक बड़ी महविश की शादी हो गई है और छोटी बहन हादिया प्राइवेट जॉब कर रही हैं. वहीं छोटा भाई अरहान 12वीं में है, वो अभी नगीना में पढ़ता है.
जुनैद एक मध्यम वर्गीय मुस्लमि परिवार से हैं. इनकी परवरिश नगीना क़स्बे में हुई. वो शुरू से पढ़ाई में औसत छात्र ही रहे. स्कूलिंग अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मिन्टू सर्किल से हुई. 12वीं के बाद स्नातक की पढ़ाई एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी से की.

जुनैद के मुताबिक़ इन्होंने अपनी तैयारी साल 2013 में शुरू की. वो लगातार तैयारी व चार अटैम्प के बाद साल 2018 में कामयाबी मिली. 352 रैंक लाकर आईआरएस बने. लेकिन उन्हें बनना सिर्फ़ और सिर्फ़ आईएएस था, इसलिए तैयारी जारी रखी और इस बार तीसरा रैंक लाकर अपना वो ख़्वाब पूरा कर लिया.

बता दें कि 27 साल के जुनैद अपने खानदान में पहला शख़्स हैं, जो आईएएस बना है. इनका मानना है कि अपनी नाकामियों से कभी नहीं घबराना चाहिए. अगर आपके दिल में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा है, ज़िन्दगी का कोई मक़सद है, और आप उस मक़सद को पाने के लिए पूरी मेहनत व लगन से कोशिश कर रहे हैं, तो कामयाबी एक न एक दिन क़दम ज़रूर चूमती है.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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