उत्तर प्रदेश

सहारनपुर में दो समुदायों में संघर्ष, एक की मौत

 

 

 

मोनू मैक

उत्तर प्रदेश में सहारनपुर ज़िले के शिमलाना गांव में शुक्रवार को हुए जातीय संघर्ष के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

पुलिस के मुताबिक अब तक 17 लोगों को गिरफ़्तार करके जेल भेजा जा चुका है और कई अन्य संदिग्ध लोगों की तलाश जारी है.

सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे के मुताबिक महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही शोभायात्रा को रोकने की वजह से ये विवाद शुरू हुआ.

दोनों पक्षों की ओर से आगज़नी और पत्थरबाज़ी की गई जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई.

एसएसपी के मुताबिक दलित समुदाय के लोगों ने गांव से शोभायात्रा निकालने का विरोध किया और शोभायात्रा पर पथराव कर दिया जिससे कई गांवों के क्षत्रिय समाज के लोग वहां पहुंच गए और फिर दोनों ओर से हिंसक कार्रवाई होती रही.

बाद में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के पहुंचने के बाद स्थिति पर नियंत्रण किया जा सका.

बताया जा रहा है कि सहारनपुर ज़िले के शिमलाना गांव में महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.

कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आस-पास के कई गांवों से क्षत्रिय समाज के लोग वहां इकट्ठा हुए थे. कार्यक्रम के बाद शोभायात्रा में डीजे और बैंडबाजे के साथ लोग चल रहे थे.

शोभायात्रा ने जब शब्बीरपुर गांव में प्रवेश किया तो दलितों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया और फिर स्थिति पथराव और आगजनी तक पहुंच गई.

पुलिस के मुताबिक दोनों ओर से जमकर मारपीट और तोड़-फोड़ की गई.

घटना में एक दर्जन से ज़्यादा लोग घायल हुए जिनमें सुमित सिंह नाम के एक व्यक्ति की बाद में मौत हो गई.

पुलिस स्थिति को नियंत्रण में और शांतिपूर्ण ज़रूर बता रही है लेकिन इलाक़े में तनाव बना हुआ है.

शनिवार को स्थिति का जायज़ा लेने के लिए राज्य के गृहसचिव देवाशीष पांडा और पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह भी सहारनपुर पहुंच रहे हैं.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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