उत्तर प्रदेश

सहारनपुर के बाद मेरठ में बवाल ,पथराव और फायरिंग, आधा दर्जन से अधिक लोग घायल

मेरठ । मेरठ जिले के दौलतपुर दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया । जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों के बीच आज जमकर पथराव और फायरिंग हुई। इसमें आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। घटना में एक युवक को गोली भी लग गई। घायलों को अस्पताल में दाखिल कराया गया है। गांव में दलितों और राजपूतों के बीच खींचातान चलती रही है। जोकि खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। मालूम हो कि दौलतपुर स्थित एक खेती की जमीन को लेकर दलितों और राजपूतों के बीच विवाद चल रहा है, जो वर्तमान समय में कोर्ट में विचाराधीन है। दोनों ही पक्ष जमीन पर अपना मालिकाना हक होने का दावा करते हैं। मामले की शुरूआत एक शख्स की मामूली बात पर गांव के ही रहने वाले कुछ युवकों से कहासुनी हो गई। आरोप है कि युवकों ने उस शख्स की पिटाई कर दी।

जिसके बाद राजपूत और दलित समाज के लोग आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों के बीच जमकर धारदार हथियार, लाठी-डंडे चले और पथराव हुआ। आरोप है कि राजपूत पक्ष द्वारा फायरिंग की गई, जिसमें पवन के पैर में गोली लगने से वह घायल हो गया। वहीं दलित पक्ष के आधा दर्जन लोग इस हमले में घायल हुए। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और दलित व राजपूत समाज के लोगों में तनाव व्याप्त हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। दलित समाज की ओर से मोहरसिंह ने राजपूत समाज के संजय पुत्र कंवरपाल के सहित कई के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। सभी आरोपी घर से फरार हैं। पुलिस आरोपियों को पकड़ने के लिए गांव में दबिश डाल रही है।  गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दी गई है।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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