उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार में कौन रहा नंबर वन और कौन पिछड़ गया

शहज़ाद अहमद रिहान (कार्यकारी सम्पादक):करीब 27 दिन तक चले चुनावों में नेताओं ने कितनी मेहनत की, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र बनारस में लगातार तीन दिन तक चुनावी रैलियां करते रहे.

बनारस में रोड शो और चुनावी सभाएं करने के साथ जिस तरह से नरेंद्र मोदी ने घर-घर जाकर लोगों से वोट मांगे हैं, वैसा उदाहरण किसी प्रधानमंत्री के लिए इससे पहले नहीं दिखा है.

चार फरवरी को मेरठ में चुनावी सभा करने के साथ नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान की शुरुआत की और कुल 23 चुनावी सभाओं को उन्होंने संबोधित किया.प्रधानमंत्री ने 11 ज़िलों में एक-एक सभाएं कीं, वहीं छह ज़िलों में उन्होंने दो-दो चुनावी सभा को संबोधित किया.मोदी ने उत्तर प्रदेश की 403 सीटों की तुलना में महज 243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में 36 चुनावी सभाएं की थीं, लेकिन वहां उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था.

वैसे उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में सबसे ज़्यादा चुनावी सभाएं राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कीं.

उन्होंने 24 जनवरी, 2017 को सुल्तानपुर से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की.36 दिनों तक चुनावी प्रचार में अखिलेश ने 221 चुनावी सभाओं को संबोधित किया, औसतन हर दिन करीब छह सभाओं को उन्होंने संबोधित किया.इसके अलावा अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन की ओर से लखनऊ, इलाहाबाद और वाराणसी में रोड शो भी किया.

इतनी चुनावी सभा इस बार के चुनाव में किसी ने नहीं की, लेकिन अखिलेश अपने पिता मुलायम सिंह के 2012 के 300 चुनावी रैलियों के करीब तक नहीं पहुंच पाए.

मुलायम सिंह ने इस बार समाजवादी पार्टी के लिए महज चार चुनावी सभाओं को संबोधित किया.

समाजवादी पार्टी की ओर से इस बार स्टार प्रचारक अखिलेश यादव की पत्नी और कन्नौज से पार्टी की सांसद डिंपल यादव साबित हुईं.उन्होंने वाराणसी के रोड शो में अखिलेश और राहुल गांधी का साथ देने के अलावा कुल 33 चुनावी सभाएं कीं.

राज्य में चुनावी सभा करने के मामले में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या 150 चुनावी सभा के साथ दूसरे नंबर पर रहे.

वहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पूरे राज्य में 100 चुनावी सभाओं को संबोधित किया.

उत्तर प्रदेश से आने वाले और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी 90 चुनावी सभाओं को संबोधित किया, जबकि योगी आदित्यनाथ ने भी 75 से ज़्यादा चुनावी रैलियों में हिस्सा लिया.

प्रचार के लिहाज से मायावती भी बहुजन समाज पार्टी की ओर से इकलौती स्टार प्रचारक थीं और उन्होंने पूरे राज्य में कुल 52 चुनावी सभाओं को संबोधित किया.एक दो दिन को अपवाद मान लें तो मायावती ने औसतन हर दिन दो सभाओं को संबोधित किया.

कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने लखनऊ, इलाहाबाद और वाराणसी में अखिलेश के साथ रोड शो करने के अलावा कुल 45 जन सभाओं को संबोधित किया.पार्टी की ओर से सबसे ज्यादा 65 चुनावी सभाएं, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने की.राज्य के प्रभारी और राज्यसभा में पार्टी के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कुल 45 चुनावी सभाओं को संबोधित किया.

हालांकि चुनावी समर शुरू होने से पहले माना जा रहा था कि प्रियंका गांधी समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन की ओर से स्टार प्रचारक होंगी, लेकिन उन्होंने महज दो चुनावी सभाओं को संबोधित किया.

इस चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा था, लिहाजा अजित सिंह ने काफी चुनाव प्रचार किया और पूरे राज्य में उन्होंने कुल 96 चुनावी सभाओं को संबोधित किया, जिसमें 42 चुनावी सभाएं उन्होंने अपने गढ़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कीं.

बहरहाल, अब सबकी नजरें अब 11 मार्च को आने वाले चुनावी नतीजों पर टिक गई हैं, उसी दिन ये तय होगा कि किसकी मेहनत रंग लाई और किसका जादू फीका पड़ा है

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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