उत्तर प्रदेश

सम्भल औवेसी ने चुनावी रैली कर किया जनसभा को संबोधित जनसभा में उमड़ा जनसैलाब

सम्भल औवेसी ने चुनावी रैली कर किया जनसभा को संबोधित । जनसभा में उमड़ा जनसैलाब । गदगद भीड़ को देखकर जोश ए जुनून के साथ ओवैसी ने किया जनसभा को सम्बोधीत जनपद सम्भल के नगरपालिका मैदान में एआईएमआईएम के प्रमुख असदउद्दीन औवेसी ने चुनावी रैली कर किया जनसभा को संबोधित । औवेसी ने पहले जनपद सम्भल के मुख्य स्थानों से चुनावी रैली की रैली में काॅफी अच्छी संख्या में कार्यकर्ताओं ने रैली को नगर के विभिन्न स्थानों से होते हुये नगरपालिका मैदान तक चुनावी रैली की । जनसभा में कार्यकर्ताओं की भीड़ देख ओवैसी ने ताबड़तौड़ समाजवादी पार्टी पर कटाक्षँ किये। कार्यकर्ताओं की भीड़ इतनी थी की लोगों को पानी की टंकी पर चड़कर सम्भल में जनसभा को सम्बोधित करने आये औवेसी को सुना देखने के लिये लोगो का तांता लग गया । गदगद भीड़ को देखकर जोश ए जुनून के साथ औवेसी ने जनसभा को संबोधित करते हुये कहा कि अखिलेश यादव से में कुछ सवाल करुगा और में उम्मीद करता हूॅ कह उनमें इतनी हिम्मत नही होगी की वो मेरे सामने आकर मेरे सवालो का जबाव दे सकें । सेर्कीलुज़म की बात यह है की जो अवाम के हक के लिये लड़ता है । तो समाजवादी और कांगे्श उन पर फिरका परिस्ति बरसने का इलजाम लगा देते है । औवेसी ने समाजवादी पार्टी को गुन्डो की सरकार भी बताया कहा की समाजवादी सरकार में दंगे व भष्टाचार तो है  ही जो बहुत मामूली बात है । जो इंसान अपने बाप का ना हुआ वो अवाम का क्या होगा । ओवैसी ने अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुये यह भी कहां की उ0प्र0 में कितने पड़े लिखें को तनासुब है । समाजवादी सरकार कहती है हमने एैसा किया वैसा किया । समाजवादी जो वादे करती है उसके वादे भी पूरे नही कर पाती ।​साथ ही ये भी कहाँ मेरी जुबान का सामना मुकाबला तो मोदी नही करपाया अखलेश तुम मेरा क्या करोगे  बहजोई जायेगी बेटियाँ तो लोग टिप्पणी करेगे बसपा व भाजपा पर इस बार ओवैसी ने बार कम करे निशाना एक ही तरफ समाजवादी पार्टी व बिना नाम लिऐ ही इशारा करते हुऐ कहाँ सम्भ ल के विकास के लिये 108 कारोड रुपये मिले थे वो रुपये कहाँ गये उन रुपये पर भी नजर पड़ गई उनकी जुबान पाँच साल से जिला मुख्यालय के लिये तो नहीं खुली चुनाव के टाईम वोट माँगने के लिये कैसे खुल गई पुरी सभा के दौरान ओवैसी ने कैबिनेट मन्त्री का नाम 23 बार लिया और मै हवाई फायरिगं नही करता समय आने पर मुख्यमंत्री से भी अपने सवाले के जबाब के लिये बहस करूगाँ अखलेश यादव को खुला चैलेज किया

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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