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कोरोना से ही नहीं ‘नफरती मीडिया’ से बखूबी लड़ रहे हैं उद्धव ठाकरे, उन्होंने दिखा दिया कि वो दमदार मुख्यमंत्री हैं

ब्रिजेश बङगूजर कार्यकारी संपादक: कोरोना वायरस के संक्रमण से उपजे हालात में जिस मुख्यमंत्री का काम सबसे बेहतर दिख रहा है उसमे सबसे पहला नम्बर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का है। उद्धव ठाकरे अपने समवर्ती साथियों से बहुत आगे चल रहे हैं ऐसा हर क्षेत्र में देखने मे आ रहा है कल जो उन्होंने अपने राज्य के गरीब मजदूरों के हित मे कदम उठाने की घोषणा की है इससे उनका कद ,सिर्फ आदमकद दिखाई दे रहा है बाकी सब मुख्यमंत्री उनके इस कद के सामने कही खड़े ही नही दिख रहे।

कल शाम को महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक आदेश निकालकर राज्य की विभिन्न चीनी मिलो में फंसे तकरीबन 1 लाख 30 हजार मजदूरों को उनको गांव में भेजने का फैसला किया है। साथ ही साथ मजदूरों की जांच करवाने का भी फैसला किया गया है। जिन मजदूरों की रिपोर्ट निगेटिव आएगी, उन्हें ही घर भेजा जाएगा।
ज्यादातर मजदूर महाराष्ट्र के बीड जिले के है इस जिले से मजदूर सूबे के अलग-अलग चीनी मिल में रोजगार के लिए जाते हैं। पलायन की बड़ी वजह यह भी है कि यहां हर साल पर्याप्त मात्रा में भयंकर सूखा पड़ता है, जिसकी वजह से लोगों को रोजी-रोटी की तलाश में मजदूरी के लिए जाना पड़ता है।
कल ही सुबह यह भी खबर आयी है कि कोरोना वायरस के संकट के बीच महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में रह रहे प्रवासी लोगों को बड़ी राहत दी है। महाराष्ट्र राज्य आवास विभाग ने शुक्रवार को मकान मालिकों से कम से कम तीन महीने तक किरायेदारों से किराया वसूली को टालने के लिए कहा है। तीन महीने के किराया ना देने पर भी मकान मालिक उन्हें मकान से खाली करने के लिए नहीं कह सकते हैं। अगर मकान मालिक ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले भी एक धुर दक्षिण पंथी पार्टी के मुखिया के रूप में अपनी बनी हुई छवि को तोड़ते हुए उन्होंने एक बयान दिया था जो आज की परिस्थितियों में बेहद आश्चर्य जनक था उन्होंने इस कोरोना काल मे समाज मे हेट वीडियो का प्रसार करने वालो के खिलाफ कहा था- ‘समाज के कुछ घातक वायरस भी हैं, इसलिए मैं उनको बताना चाहता हूं कि COVID-19 से तो मैं अपनी जनता को बचा लूंगा, लेकिन उसके बाद तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा पायेगा. इसलिए कृपया कर गलत वीडियो ना घुमाएं.”
इसके अलावा भी उद्धव ठाकरे ने नफरत फैलाने वाले मीडिया के खिलाफ प्रो एक्टिव नजर आए हैं जिसकी बहुत बार तारीफ भी हुई है जिस तरह से वधावन फैमिली को महाबलेश्वर भेजे जाने पर अपने ट्विटर हैंडल से अपने गृहमंत्री को तुरंत हड़काया था वह एक अभूतपूर्व घटना थी गृहमंत्री उनकी सहयोगी पार्टी NCP के है उद्धव ने इसके बावजूद इस बात की कोई परवाह नही की, कोविड -19 को लेकर उन्होंने जो टास्क फोर्स बनाई है उसमे सारे लोग स्पेशलिस्ट है उसमे डॉक्टरों को शामिल किया गया है बाकी प्रदेशो की तरह सिर्फ बड़े आईएएस अधिकारियों को नही।
यह सारे कदम दिखा रहे है कि उद्धव ठाकरे इस संकट काल मे बहुत बेहतर ढंग काम कर रहे हैं। कभी सोचा नही था कि एक वक्त ऐसा आएगा जब धुर दक्षिण पंथी पार्टी के मुखिया की प्रशासनिक क्षमता की तारीफ करना पड़ेगी। पर जो सही है उसे सही बोलना भी पड़ेगा।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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