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Twitter Reels style video: ट्विटर अब फीड में दिखाएगा टिकटॉक और रील्स जैसे वीडियो 

Twitter TikTok and Instagram style video: ट्विटर आईओएस पर एक नया फीचर लेकर आ रहा है. ट्विटर ने सोशल मीडिया साइट्स पर वर्टिकल वीडियोज की सफलता को देखते हुए खुद भी इस क्षेत्र में उतरने का फैसला किया है.  माइक्रोब्लॉगिंग कंपनी ने घोषणा की कि वह ट्विटर आईओएस ऐप के उपयोगकर्ताओं के लिए इमर्सिव फुल-स्क्रीन वीडियो लॉन्च करने वाला है.

कंपनी ने  एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि, ट्विटर का अपडेटेड इमर्सिव मीडिया व्यूअर एक क्लिक के साथ वीडियो को पूरी स्क्रीन पर फैला देगा, जिससे आप आसानी से पूरी इमर्सिव व्यूइंग वीडियो का अनुभव ले सकेंगे. इसे चालू करने के लिए, बस ट्विटर ऐप में एक वीडियो पर टैप / क्लिक करना होगा. ये वीडियो टिकटॉक और इंस्टाग्राम रील्स जैसी वर्टिकल वीडियोज की तरह से दिखेंगी.

ट्विटर द्वारा शेयर किए गए ब्लॉग पोस्ट और स्क्रीनशॉट के अनुसार, ट्विटर इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है. जैसा कि इंस्टाग्राम रीलों जैसे अन्य प्लेटफार्मों पर होता है एक बार जब आप फ़ुल-स्क्रीन मोड में वीडियो देखते हैं, तो आप अधिक वीडियो की फ़ीड नीचे जाने के लिए ऊपर स्क्रॉल कर सकते हैं. जब आप तय कर लेते हैं कि आप अब वीडियो नहीं देखना चाहते हैं, तो आप मूल ट्वीट में वापस जाने के लिए टॉप कोने पर स्थित पीछे के तीर को हिट कर सकते हैं.

वीडियोज को लाइक, शेयर और रिट्विट किया जा सकेगा

लेकिन ये वीडियो अभी भी ट्वीट का हिस्सा होंगे और उपयोगकर्ता वीडियो से जुड़े ट्वीट को देखने के लिए स्क्रीन पर क्लिक कर सकेंगे और वे इसे लाइक, रिप्लाई और रीट्वीट भी कर सकेंगे. नया वीडियो अनुभव ऐप के एक्सप्लोर सेक्शन में भी मिलेगा. एक्सप्लोर सेक्शन में अब ट्वीट्स और ट्रेंड्स के साथ वीडियो भी शामिल होंगे. ट्विटर द्वारा घोषित सुविधाओं के अलावा, ऐसा भी लगता है कि कंपनी वीडियो व्यू काउंट फीचर के साथ प्रयोग कर रहा है. ठीक उसी तरह जैसे यह इंस्टाग्राम रील्स पर उपलब्ध है. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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