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एक Phone में 2 SIM चलाने वालों के लिए बुरी खबर! Trai लगा सकता है जुर्माना, देना पड़ेगा चार्ज

Government to Take Charge on Sim Cards: एक स्मार्टफोन में दो सिम चलाने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल, सरकार ने एक फोन में दो सिम चलाने पर जुर्माना लगाने का प्लान कर रही है. ईटी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दूरसंचार नियामक ने इसे लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नंबरों के दुरुपयोग को रोकने के लिए ये फैसला लिया जा रहा है. 

नियामक के अनुसार, ऐसे कई यूजर्स हैं जो अपने फोन में दो सिम रखे हुए हैं लेकिन यूज एक ही सिम कर रहे हैं. नियामक का कहना है कि मोबाइल नंबर सरकार की संपत्ति है, जिन्हें दूरसंचार कंपनियों को एक तय सीमा के लिए दिया जाता है. सरकार सिम कार्ड के बदले शुल्क वसूलती कर सकती है. 

इन सिम कार्ड्स को बंद करने की तैयारी

Trai के आंकड़ों के मुताबिक,  मोबाइल ऑपरेटर अपना यूजरेबस न खोने की वजह से ऐसे सिम कार्ड को बंद करने का प्लान बना रही है, जो लंबे समय से यूज नहीं हो रहे हैं. नियमों के अनुसार, अगर कोई यूजर लंबे समय तक सिम कार्ड में रिचार्ज नहीं करवाता है तो उसे ब्लैकलिस्ट करने का भी प्रावधान है. ऐसे में Trai की ओर से मोबाइल ऑपरेटर पर जुर्माना लगाए जाने का प्लान बनाया गया है. आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वक्त में 219.14 मिलियन से ज्यादा मोबाइल नंबरों को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी है, जो लंबे समय से यूज में नहीं हैं. 

इन देशों में मोबाइल नंबर के लिए लगता है चार्ज

ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, बेल्जियम, फिनलैंड, यूके, लिथुआनिया, ग्रीस, हांगकांग, बुल्गारिया, कुवैत, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका और डेनमार्क जैसे देशों में टेलिकॉम कंपनियां चार्ज वसूलती हैं.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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