उत्तर प्रदेश

“EVM”से छेड़छाड़ की बात सरासर गलत है, भ्रामक खबरों से रहें दूर

मौहम्मद असलम अंसारी(प्रभारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश SBT):“EVM” से छेड़छाड़ की बात सरासर गलत है। EVM में इंटरनेट का कोई कनेक्शन नहीं होता है, इसलिए इसे ऑनलाइन होकर हैक नहीं किया जा सकता। किस बूथ पर कौन सा EVM जायेगा, इसके लिए रैंडमाइजेसन की प्रक्रिया होती है,  अर्थार्थ सभी EVM को पहले लोकसभा वार फिर विधानसभा वार और सबसे अंत में बूथवार निर्धारित किया जाता है और पोलिंग पार्टी को एक दिन पहले डिस्पैचिंग के समय ही पता चल पाता है कि उसके पास किस सीरिज का ईवीएम आया है। ऐसे में अंतिम समय तक पोलिंग पार्टी को पता नहीं रहता कि उनके हाथ में कौन सा ईवीएम आने वाला है।  बेसिक तौर पर EVM में दो मशीन होती है, बैलट यूनीट और कंट्रोल यूनीट……वर्तमान में इसमें एक तीसरी यूनिट वीवीपीएटी भी जोड़ दिया गया है, जो सात सेकंड के लिए मतदाता को एक पर्ची दिखाता है जिसमें ये उल्लेखित रहता है कि मतदाता ने अपना वोट किस अभ्यर्थी को दिया है। ऐसे में अभ्यर्थी बूथ पर ही आश्वस्त हो सकता है कि उसका वोट सही पड़ा है कि नहीं।  वोटिंग के पहले सभी EVM की गोपनीय जांच की जाती है और सभी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही EVM को वोटिंग हेतु प्रयुक्त किया जाता है।  सबसे बड़ी बात वोटिंग के दिन सुबह मतदान शुरु करने से पहले मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी द्वारा सभी उम्मीदवारों के मतदान केन्द्र प्रभारी या पोलिंग एंजेट के सामने मतदान शुरु करने से पहले मॉक पोलिंग की जाती है और सभी पोलिंग एंजेट से मशीन में वोट डालने को कहा जाता है ताकि ये जांचा जा सके कि सभी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट गिर रहा है कि नहीं। ऐसे में यदि किसी मशीन में टेंपरिंग या तकनीकि गड़बड़ी होगी तो मतदान के शुरु होने के पहले ही पकड़ ली जायेगी। मॉक पोल के बाद सभी उम्मीदवारों के पोलिंग एंजेट मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी के प्रभारी को सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट देते है। इस सर्टिफिकेट के मिलने के बाद ही संबंधित मतदान केन्द्र में वोटिंग शुरु की जाती है। ऐसे में जो उम्मीदवार EVM में टैंपरिंग की बात कर रहे है वे अपने पोलिंग एंजेट से इस बारे में बात कर आश्वस्त हो सकते है. मतदान शुरु होने के बाद मतदान केन्द्र में मशीन के पास मतदाताओं के अलावा मतदान कर्मियों के जाने की मनाही होती है, वे EVM के पास तभी जा सकते है जब मशीन की बैट्री डाउन या कोई अन्य तकनीकि समस्या होने पर मतदाता द्वारा सूचित किया जाता है। हर मतदान केन्द्र में एक रजिस्टर बनाया जाता है, इस रजिस्टर में मतदान करने वाले मतदाताओं की डिटेल अंकित रहती है और रजिस्टर में जितने मतदाता की डिटेल अंकित होती है, उतने ही मतदाताओं की संख्या EVM में भी होती है। काउंटिंग वाले दिन इनका आपस मे मिलान मतदान केंद्र प्रभारी (presiding officer) की रिपोर्ट के आधार पर होता है. सुप्रीम कोर्ट में EVM टैंपरिंग से संबंधित जितने भी मामले पहले आये उनमें से किसी भी मामले में EVM में टैंपरिंग सिद्ध नहीं हो पायी है। स्ंवय चुनाव आयोग आम लोगों को आंमत्रित करता है कि वे लोग आयोग जाकर EVM की तकनीक को गलत सिद्ध करने हेतु अपने दावे प्रस्तुत करे। लेकिन आज तक कोई भी दावा सही सिद्ध नहीं हुआ है।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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2 Comments

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