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मोदी सरकार द्वारा चलाई गई लकी ड्रॉ योजनाओं में अबतक 3.81 लाख उपभोक्ताओं और 21,000 व्यापारियों को विजेता घोषित किया जा चुका है।

 

मोदी सरकार द्वारा चलाई गई लकी ड्रॉ योजनाओं में अबतक 3.81 लाख उपभोक्ताओं और 21,000 व्यापारियों को विजेता घोषित किया जा चुका है। इसपर कुल खर्च 60.9 करोड़ का आया। इसमें जीते विजेताओं को 24 अलग-अलग डिजी धन मेलों में विजय घोषित किया गया। ये इवेंट दिल्ली, लुधियाना, पणजी, लखनऊ, जम्मू, बेंगलुरु और हैदराबाद में हुए थे। जिन लोगों ने इनाम जीता उसमें अलग-अलग तरह के लोग शामिल हैं। जिसमें किसान, आंगनवाड़ी में काम करने वालों के साथ-साथ गृहणी भी शामिल हैं। इनाम जीतने वालों लोगों में से ज्यादातर की उम्र 21 से 30 साल के बीच की है।

 

इन राज्यों के लोग सबसे आगे: जिन राज्यों के लोगों ने सबसे ज्यादा इनाम जीता उसमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक शामिल हैं। एक फरवरी तक 21 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में लकी ड्रा को किया जा चुका होगा। इसमें आने वाले दिनों में ईटानगर, भोपाल, थाणे, इंदौर, चेन्नई, जयपुर और पोर्ट ब्लेयर नाम शामिल है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने पिछले साल नीति आयोग के जरिए दो योजनाओं की शुरुआत की थी। जिनके नाम डिजिधन व्यपार योजना और लकी ग्राहक योजना रखा गया था। इन स्कीम्स को सरकार ने 25 दिसंबर, 2016 से शुरू किया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बताया था कि स्कीम अंबेडकर जयंती यानी 14 अप्रैल 2017 तक चालू रहेगी।

कौन जीतेगा ? इसके तहत RuPay कार्ड, BHIM ऐप, UPI (Bharat Interface for Money/Unified Payment Interface), USSD की *99# की सर्विस, और आधार इलेबल सिस्टम से पेमेंट करने वालों में से लोगों को चुना जाएगा। सरकार ने कहा था कि देशभर के लोगों को डिजिटल पेमेंट की तरफ आकर्षित करने के लिए 100 डिजिधन मेले लगाए जाएंगे।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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