उत्तर प्रदेश

उ0प्र0 शासन द्वारा निजी चिकित्सालयों में आकस्मिक आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने से पूर्व आवश्यक सुरक्षात्मक व्यवस्था सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में एडवाईजरी जारी

शहजाद अहमद रिहान उप संपादक :जिलाधिकारी रमाकांत पाण्डेय ने प्रमुख सचिव, उ0प्र0 शासन के पत्र के हवाले से जानकारी देते हुए बताया कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के दृष्टिगत लाॅकडाउन को  20 अपै्रल,20 से कतिपय आपातकाल सेवाओं के संचालन में शिथिलता के फलस्वरूप चिकित्सालयों को आकस्मिक आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एडवाईजरी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि निजी चिकित्सालयों में आकस्मिक आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि चिकित्सालय के चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को कोविड-19 से संबंधित प्रोटोकाल तथा इन्फेक्शन प्रिवेन्शन प्रोटोकाल का समुचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए तथा चिकित्सालय में मरीजों की स्क्रीनिंग (ज्तपंहम) करने के लिए एक अलग स्थान सुरक्षित स्क्रीनिंग व्यवस्था एवं क्रियाशील होना सुनिश्चित किया जाए। उन्होनंे बताया कि चिकित्सालय में सुरक्षात्मक उपकरण जैसे मास्क, ग्लव्स यानी दस्ताने इत्यिादि समुचित मात्रा एवं यथा आवश्यक प0ीपी0ई0 उपलब्ध होनी चाहिए। इसके अलावा भारत सरकारी द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशों के अनुसार चिकित्सालय परिसर के बाहर एवं अन्दर के समस्त क्षेत्र का एक प्रतिशत (1ः) सोडियम हाईपोक्लोराइट सोल्यूशन द्वारा विसंक किया जाना सुनिश्तिच किया जाए तथा बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की गाईडलाइंस को शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को कड़े निर्देश दिए कि निजी चिकित्सालयों में उपरोक्त निर्देशों का कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित कराएं।

 

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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