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टेक कंपनियों के कर्मचारियों पर मंडरा रहा खतरा, Amazon और Meta के बाद सिस्को में भी छटनी शुरू

Cisco Layoff: महामारी के बाद से आई मंदी की वजह से दुनिया भर की कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी का सिलसिला जारी है. इसी बीच टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनी सिस्को (Cisco) ने भी इसमें पहल की शुरुआत कर दी है. टेक दिग्गज कंपनी ने पिछले महीने ही इसकी घोषणा कर दी थी और अब बड़े पैमाने पर सिस्को से कर्मचारियों की छंटनी की शुरुआत हो चुकी है. तथाकथित सिस्को कर्मचारियों ने TheLayoff.com और अन्य प्रोफेशनल नेटवर्किंग साईट पर नई नौकरियों की तलाश करनी शुरू कर दी है. कंपनी ने भी छंटनी की बात को लेकर पुष्टि कर दी है.

4000 कर्मचारियों की हुई छंटनी
टेक सेक्टर की दिग्गज कंपनी सिस्को छटनी की शुरुआत करते हुए अपने यहां से 4 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर दी है. सिस्को ने पिछले महीने यानी नवंबर में ही छंटनी करने का ऐलान कर दिया था. सिस्को के कई कर्मचारियों ने सोशल साइट्स पर लिखे संदेशों के जरिए लेऑफ की बताई है. छंटनी की चपेट में आए कर्मचारी नई नौकरी की तलाश में लोगों से रेफरल्स देकर मदद करने की अपील कर रहे हैं.

दो दर्जन कंपनियों में छंटनी
आईटी और टेक समेत कई सेक्टर की नौकरियों पर इन दिनों छंटनी का बुरा समय चल रहा है. ट्विटर, अमेजन, मेटा और जोमैटो जैसी जानी मानी कम्पनियों समेत करीब दो दर्जन कंपनियों ने बीते महीनों कर्मचारियों को नौकरी से बाहर किया है. रिपोर्ट के मुताबिक दिग्गज टेक कंपनी सिस्को ने भी बीते माह नवंबर में अपनी वर्कफोर्स घटाने का ऐलान किया था और अब वह भी इसकी शुरुआत कर चुकी है.

राजस्व में बढ़त के बावजूद छंटनी
सिस्को में करीब 4000 कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 83,000 के आसपास है. छंटनी को लेकर कहा गया है कि यह छटनी कंपनी अधिनियम के तहत की जाएगी. सिस्को के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चक रॉबिन्स ने छंटनी की घोषणा के दौरान कहा था कि हम वह वही काम कर रहे हैं जिसका उन्हे अधिकार है. गौरतलब है कि तिमाही की आय रिपोर्ट (Q1 2023) में सिस्को का कुल राजस्व में 13.6 अरब डॉलर है जोकि पिछले साल से 6 प्रतिशत ज्यादा है. जिसके बावजूद इस छटनी की शुरुआत हुई है.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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