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सूरत: सैलरी और खाना ना मिल पाने से नाराज प्रवासी मजदूरों ने की तोड़फोड़, गाड़ियों को किया आग के हवाले

लॉकडाउन की वजह से सूरत में फंसे कई प्रवासी मजदूरों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया. जानकारी के मुताबिक मजदूरों ने शुक्रवार की रात तोड़फोड़ की और वाहनों को आग लगा दी. इस बारे में एक अधिकारी ने बताया कि ये लोग अपने घर लौटने के लिए इंतजाम करने की मांग कर रहे थे. साथ ही अपना भुगतान भी जल्द से जल्द कराए  जाने की मांग भी कर रहे थे.  पुलिस ने बताया कि सूरत के लसगण इलाके में कई लोग सड़कों पर उतर आए और दुकानों में आग लगा दी. मजदूरों ने मांग की कि उन्हें अपने गृह स्थान जाने की परमिशन दी जानी चाहिए.  अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल हालात काबू में हैं. कुछ प्रवासी कामगारों को हिरासत में भी लिया गया है.

आगजनी करते प्रवासी कामगार

बता दें कि देश पर कोरोनावायरस का संकट गहराता जा रहा है. शुक्रवार शाम स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आकंड़ों के अनुसार इस भयानक वायरस के कारण अब तक 206 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं संक्रमितों की संख्या 6761 पर पहुंच गई है. इसके अलावा 516 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. वहीं बात करें पिछले 24 घंटों में आए मामलों की तो आपको बता दें कि पिछले 24 घंटों में 896 नए मामले सामने आए हैं और 37 लोगों की मौत हो चुकी है. अकेला भारत ही इस वायरस की चपेट में नहीं है बल्कि संपूर्ण विश्व इस खतरनाक बीमारी के खिलाफ जंग लड़ रहा है.
शुक्रवार शाम तक पूरी दुनिया में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 1 लाख से ऊपर पहुंच गई है. दुनिया में करोड़ों लोग कोविड-19 महमारी के चलते जारी लॉकडाउन में घरों में कैद हैं. कोरोना संकट का असर अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है. दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ रही है. अमेरिका जैसे देशों में भी लाखों लोगों के सामने रोजगार संकट उत्पन्न हो गया है. भारतवासियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आई हैं.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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