उत्तर प्रदेश

सपा का घोषणा पत्र: गरीब महिलाओं को प्रेशर कुकर, युवाओं को स्‍मार्टफोन, बच्चों को घी

लखनऊ. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बस थोड़ी ही देर में अपना घोषणा पत्र जारी करेंगे। सूत्रों की मानें तो, सपा के घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए काफी कुछ हो सकता है। इसके अलावा समाजवादी कैंटीन, अलग-अलग शहरों में मेट्रो और एक्सप्रेस वे इस घोषणा पत्र का अहम हिस्सा हो सकते हैं। साथ ही गरीब और अल्‍पसंख्यकों के लिए भी अखिलेश कुछ विशेष घोषणाएं कर सकते हैं।

यूपी चुनाव 2017 के लिए सपा का घोषणा पत्र…

1. लैपटॉप, समाजवादी पेंशन योजना, एक्सप्रेस-वे, कन्‍या विद्याधन जैसी कल्‍याणकारी योजनाओं को और मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।
2. किसानों से जुड़ी सभी समस्‍याओंं का निवारण किया जाएगा। 

3. गरीब महिलाओं को प्रेशर कुकर ताकि वे कम वक्‍त में खाना बना सके।
4. अल्‍पसंख्यकों के लिए विशेष योजनाएं।
5. डेवलेपमेंट स्कीम और युवाओं के लिए स्‍टार्टअप योजनाओं का शुभारंभ किया जाएगा।
6. मजदूरों को रियायती दरों पर मिड डे मील।
7. व्‍यापारियों को व्‍यापार के लिए सुरक्षा के लिए गारंटी।
8. समाजवादी किसान कोष बनाएंगे।
9. असंगठित मजदूरों के लिए विशेष योजनाएं।
10. आगरा, कानपुर और मेरठ में भी मेट्रो।
11. लखनऊ एयरपोर्ट में एयर एंबुलेंस।
12. गांवों में भी 24 घंटे बिजली।

13. ग्रीन फील्‍ड टाउनशिप।

14. ग़रीब बच्चों के लिए एक लीटर घी और एक किलो मिल्क पाउडर देने का काम करेंगे ।
15. जानवरों के लिए एम्बुलेंस की व्‍यवस्‍था।
16. तहसील स्तर पर फ़ैमिली बाज़ार।
17. वरिष्ठ नागरिकों  के लिए ओल्ड होम योजना।
18. एक्सप्रेस-वे के किनारे स्किल डिवेलपमेंट।
19. महिलाओं को बस के किराए में छूट।
20. 1.5 सालाना आय  कम वालों को सभी तरह का इलाज फ्री।
गाजीपुर-बलिया तक बनाएंगे सड़क

अखिलेश ने कहा कि सड़क पर चलो तो पता लगता है कि सड़क कैसी है। लखनऊ-आगरा तक सड़क बन गई है। अब ऐसी ही सड़क गाजीपुर-बलिया तक बनवाएंगे। सड़कों के किनारे मंडी भी बनवा रहे हैं।

अखिलेश यादव ने क्या कहा…
हमें गर्व है कि साढ़े चार साल में विकास के लिए सभी कार्य किए। आज जो वादा करेंगे उसे अगले कार्यकाल में सभी वादे पूरे होंगे। यूपी उत्तम प्रदेश बनकर आएगा। 2012 में जब हमें सत्ता मिली यूपी एक पिछड़ा राज्य था।
आज एक बात तो साफ है हम सब आने वाले समय में मिलकर समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने वाले हैं।
सपा सरकार ने बड़े पैमाने पर अपने वादे पूरे किए। हमारे कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं।
मंच से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, जो बात घोषणा पत्र में नहीं थी वो काम भी समाजवादी सरकार ने पूरा किया है।
बहुत काम हुआ, बड़े पैमाने पर काम हुआ है। इससे भी आगे काम करना हैः
तीन साल में अच्छे दिन औऱ विकास अभी तक नहीं आया। विकास के बहाने झाड़ू पकड़ाई और योगा कराया।

आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर चलने वाले लोग खुद-ब-खुद साइकिल का बटन दबाकर आएंगे।

काम तो दीखता नहीं काम से कम अच्छे दिन की परिभाषा ही बता दो। अखिलेश का भाजपा पर तंज।

– 1 करोड़ 40 लाख रजिस्ट्रेशन स्मार्ट फोन के लिए हुए । अगर इन्होंने ही वोट दिया तो 300 सीट आ जायेगी।

सपा के किन नेताओं ने क्या कहा…
बलवंत सिंह रामूवालिया- पहली दफा ये पता चला की अल्पसंख्यक बहुसंख्यक के बराबर और कहीं ज़्यादा है। यूपी की हर माँ का बेटा और बहन का भाई है अखिलेश जी। रामूवालिया ने भावनाओं में बहाये आंसू।           
माता प्रसाद पांडेय- ये मेनिफेस्टो आने वाली सरकार सपा की होगी यह तय करेगा। आज जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि।
साहित्यकार उदय प्रताप सिंह- तलवार बाँधने का अधिकार उसी को होता है जो तलवार चलाने की कुशलता रखता हो। मुझे नहीं लगता कि पूरे भारत में आज अखिलेश जी जैसा कम उम्र और योग्य राजनेता है।
किरनमय नंदा- आज छोटे लोहिया जनेश्वर जी की बरसी है, उन्हें श्रद्धांजलि। 2017 में दूसरी बार यूपी में अखिलेश के नेतृत्व में दूसरी बार सराकर बनेगी। यूपी में जितना वोक्स किया उससे विकासपुरुष के तौर पर अखिलेश स्थापित हो गए हैं। हमें गर्व है कि साढ़े चार साल में विकास के लिए सभी कार्य किए। आज जो वादा करेंगे उसे अगले कार्यकाल में सभी वादे पूरे होंगे। यूपी उत्तम प्रदेश बनकर आएगा। 2012 में जब हमें सत्ता मिली यूपी एक पिछड़ा राज्य था।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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