उत्तर प्रदेश

बुलंदशहर भाजपा उपाध्यक्ष अजय कुमार लोधी के द्वारा छात्र-छात्राओं को जूते वितरण किए गए

अजय कुमार लोधी के द्वारा छात्र-छात्राओं को वितरण किए गए जूते:-

आज दिनांक 10 दिसंबर 2019 को वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ग्राम घुसाना गैल डिबाई बुलंदशहर में 8:30 बजे से इंजीनियर गोपाल सिंह के द्वारा यज्ञ किया गया तथा 9:30 बजे से स्कूली बच्चों को योग सिखाया गया योग शिक्षक जवाहरलाल, भूप सिंह एडीओ, ओम प्रकाश ,जयपाल सिंह ठेकेदार, विशंभर सिंह तथा रामजीलाल अध्यापक ने कपालभाति, अनुलोम विलोम , मंत्र योग, कपालभाति, प्राणायाम योग से मानसिक विकारों के द्वार खुलते हैं अन्य भिन्न भिन्न प्रकार के योग करके स्कूली छात्र-छात्राओं में और आये हुए अभिभावकों एवं आगंतुकों का मन मोह लिया उसके बाद अजय कुमार लोधी जिला उपाध्यक्ष भाजपा बुलंदशहर में 11:30 बजे से 2:30 बजे तक स्कूली छात्र छात्राओं को जूता (चरण पादुका) अपने निजी स्रोतों से वितरण किए उपस्थित सभी क्षेत्रवासियों ने जूता वितरण कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रशंसा की तथा उन्होंने भी अपने हाथों से तथा अध्यापक और अध्यापिकाओ ने नन्हे मुन्ने सुकोमल छात्राओं को अपने हाथों से जूता पहनाने का काम किया जूता पहनने के बाद छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे और खुशी-खुशी डिब्बों सहित जूते घर को ले गए

उपस्थित जन:-
अमर सिंह, कप्तान सिंह, नरेंद्र कुमार, विजेंद्र पाल सिंह, सत्यप्रकाश सिंह, बबली राज ,रमेश कुमार, महावीर सिंह, राजवीर सिंह, कुमारी निशा शर्मा, कुमारी विनीता शर्मा, कुमारी सर्वेश,हंसराज सिंह ,राजवीर सिंह, जयप्रकाश सिंह, लक्ष्मण सिंह फौजी ,बीरेंद्र सिंह, श्रीमती आर्या मार्या ,राजपाल सिंह नरेंद्र दास आचार्य ,रोशन सिंह ,राजपाल सिंह वीपी सिंह ,तेज सिंह वर्मा, मुन्नालाल, उदल सिंह प्रधान ,हुकम सिंह सहित अनेक लोग कार्यक्रम उपस्थित रहे

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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