उत्तर प्रदेश

प्रदेश भर में फैले शिवपाल समर्थकों पर है मायावती की नजर

वह लंबे समय से कह रही हैं कि बाप-बेटे की लड़ाई में शिवपाल यादव बलि का बकरा बन गए। शनिवार को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि शिवपाल को अपमानित किया जा रहा है। यादव वोटरों के दो खेमों में वोट करने की बात वह लंबे समय से कहती आ रही हैं। इससे साफ है कि परिवार की फूट को वह और हवा दे ही रही हैं, साथ ही उनकी नजर शिवपाल के वोटरों और समर्थकों पर भी है। इसके जरिए वह एसपी की फूट का फायदा विधान सभा चुनाव में उठाना चाह रही हैं और शिवपाल समर्थकों को लुभा रही हैं।फूट को हवा देकर दिखाया बीजेपी का डर

जब से समाजवादी पार्टी परिवार में झगड़ा शुरू हुआ है, तब से मायावती कह रही हैं कि यादव वोट बैंक दो खेमों में बंट गया है। लगातार यह बयान देकर पहले तो उन्होंने मुसलमान वोटरों से साफ कहा कि सपा को वोट देने का कोई फायदा नहीं। इसके जरिए बीएसपी को मजबूत दिखाकर बीजेपी को हराने के लिए वोट करने की अपील की। वहीं एसपी की अंदरूनी फूट को बढ़ाने की कोशिश की ताकि यादव वोटर भ्रमित रहे।

झगड़े को स्टंट बता, शिवपाल से हमदर्दी

जब समाजवादी पार्टी का झगड़ा और बढ़ा तो मायावती ने अखिलेश और मुलायम को एक दिखाने की कोशिश की और लगातार कहा कि यह पिता-पुत्र का ड्रामा है। वहीं शिवपाल यादव के साथ हमदर्दी दिखानी शुरू कर दी। वह कहती रहीं कि पिता-पुत्र की लड़ाई में शिवपाल यादव को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।समर्थकों के दर्द को कुरेदा

मायावती के बयानों के अनुसार शिवपाल जब अब वास्तव में अकेले पड़ गए हैं तो उन्होंने शनिवार को और ज्यादा हमदर्दी जता दी। यहां तक कह दिया कि शिवपाल को एक सीट तक सीमित कर दिया गया है और सपा में उन्हें अपमानित किया जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि शिवपाल यादव भी बीएसपी में आएंगे तो उन्होंने कहा कि पहले वह गुजारिश करें तो इसका जवाब वह देंगी। शिवपाल समर्थकों के दर्द को कुरेदकर मायावती ने उनकी सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की है।शिवपाल के दुख पर मरहम

मायावती ने शिवपाल के प्रति इतनी ज्यादा हमदर्दी उस समय दिखाई है जब एक दिन पहले शिवपाल ने कार्यकर्ताओं के बीच खुद अपना दु:ख उजागर किया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा तो नहीं हो रही लेकिन नेताजी ने कहा है, इसलिए लड़ रहे हैं।कुछ समर्थक भी आए तो बोनस

इतना अपमान सहने और सब कुछ गंवा चुके शिवपाल के समर्थक पूरे प्रदेश में हैं। वह चुनाव सिर्फ जसवंतनगर से लड़ रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के अन्य विधान सभा सीटों पर कुछ भी शिवपाल समर्थक वोटर अखिलेश को हराने के मकसद से ही मायावती को सपोर्ट कर जाएं, तो यह बोनस ही होगा। शिवपाल के प्रति हमदर्दी दिखाकर मायावती इसी कोशिश में हैं।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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