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Bigg Boss OTT 3: सना मकबूल की जीत पर बिफरे लोग, बोले- ‘मेरे लिए तो नेजी विनर है’

‘बिग बॉस ओटीटी 3’ की शुरुआत 21 जून से हुई थी और फाइनली 42 दिन बाद शो को विनर मिल गया है। एक्ट्रेस और मॉडल सना मकबूल ने ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ की ट्रॉफी अपने नाम की है। सना मकबूल ने नेजी को दूसरे पायदान पर छोड़ते हुए शो को अपने नाम कर लिया है। ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ को जीतने पर सना मकबूल के तमाम चाहने वाले फैंस उन्हें बधाई दे रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर तमाम यूजर्स ने इस जीत को गलत बताया है। ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ के विनर को लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। सोशल मीडिया पर लोग सना मकबूल को नहीं बल्कि दूसरे कंटेस्टेंट को विनर बनते देखना चाह रहे थे। आइए जानते हैं कि ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ को विनर मिलने के बाद लोग क्या रिएक्शन दे रहे हैं।

सना मकबूल की जीत पर उठाए सवाल

रियलिटी शो ‘बिग बॉस ओटीटी’ का तीसरा सीजन खत्म हो गया है और सना मकबूल इस बार विनर बनी हैं और नेजी दूसरे नंबर पर रहे हैं। सना मकबूल ने 25 लाख रुपये के साथ ही ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ की ट्रॉफी उठाई है। सना मकबूल के विनर बनने के बाद उनकी फैमिली और फ्रेंड के अलावा फैंस काफी खुश नजर आए और उन्हें बधाई दे रहे हैं। सना मकबूल की जीत से उनके तमाम चाहने वाले लोग खुश हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर सामने आ रहे रिएक्शन से पता चल रहा है कि सना मकबूल की जीत तमाम लोग को गलत लग रही है। यहां पर तमाम सोशल मीडिया यूजर्स के रिएक्शन है जिन्हें सना मकबूल को ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ के विनर बनने का फैसला गलत लग रहा है।

‘बिग बॉस ओटीटी 3’ के फिनाले में पहुंचे थे ये कंटेस्टेंट

बताते चलें कि ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ के टॉप 5 फाइनलिस्ट में कृतिका मलिक, सई केतन राव, सना मकबूल, रणवीर शौरी और नेजी ने अपनी जगह बनाई थी। ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ को बॉलीवुड इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर होस्ट कर रहे थे। ‘बिग बॉस ओटीटी 3’ ने 6 सप्ताह तक लोगों को जमकर एंटरटेन किया है।

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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