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Rockstar Re-Release Box Office: रणबीर कपूर की रॉकस्टार ने सालों बाद थिएटर में फिर से लगाई आग, 18 दिन में की इतनी कमाई | Bollywood Life हिंदी

फैंस की डिमांड पर बॉलीवुड की कई फिल्मों को थिएटर में सालों बाद दोबारा रिलीज किया गया है। कुछ समय पहले सनी देओल की फिल्म गदर के पहले पार्ट ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की। इसी लिस्ट में अब रणबीर कपूर की फिल्म रॉकस्टार का भी नाम शामिल हो चुका है। कुछ हफ्ते पहले ही इम्तियाज अली की ये फिल्म ने थिएटर में दोबारा रिलीज हुई है। साल 2011 में रिलीज हुई इस फिल्म सेमी हिट साबित हुई थी। उस समय रणबीर कपूर और नरगिस फाखरी की इस फिल्म ने डोमेस्टिक लेवल पर तकरीबन 70 करोड़ के आसपास कमाई की थी। वहीं वर्ल्डवाइड यह फिल्म 110 करोड़ के अंदर ही सिमट गई थी। हालांकि फिल्म ने दोबारा रिलीज होने के बाद अपना कमाल जरूर दिखाया है।

थिएटर में कमाल कर रही है रॉकस्टार

बता दें कि रणबीर कपूर की इस फिल्म को देखने के लिए लोग थिएटर पहुंच रहे हैं। तीसरे सोमवार तक ही इस फिल्म ने 1.80 करोड़ की कमाई कर डाली है। रिपोर्ट्स की मानें तो रॉकस्टार थिएटर में चौथे हफ्ते भी लगी रहेगी। अगर ऐसा होता है तो यकीनन रॉकस्टार दोबारा रिलीज होने के बाद कोई रिकॉर्ड जरूर तोड़ डालेगी। बता दें कि फिल्म ने रिलीज होने के तीसरे हफ्ते में 70 लाख से ज्यादा की कमाई की है। Also Read – पापा रणबीर कपूर के गाल में राहा ने किया Kiss, देख मुस्कुराईं आलिया भट्ट; एयरपोर्ट से वायरल हुआ ये क्यूट वीडियो

रणबीर कपूर के करियर

बात की जाए रणबीर कपूर की तो ये फिल्म उनके करियर के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुई थी। इस फिल्म में रणबीर कपूर की एक्टिंग देखकर हर कोई दंग था। फिल्म की कहानी के साथ-साथ गानों ने भी लोगों को खूब एंटरटेन किया। वहीं फिल्म के गाने सालों-साल लोगों की जुबान पर रहे। ‘तुम हो’, ‘साड्डा हक’ और ‘कुन फाया कुन’ लंबे समय तक म्यूजिक चार्ट्स पर छाया रहा है। वैसे आप रॉकस्टार को दोबारा थिएटर में देखने की प्लानिंग कर रहे हैं या नहीं? कमेंटबॉक्स में जरूर बताइएगा। साथ ही ऐसी एंटरटेनमेंट न्यूज के लिए पढ़ते रहिए बॉलीवुडलाइफ। Also Read – Ramayana: लंबे इंतजार के बाद रामायण की रिलीज डेट पर आया बड़ा अपडेट, बजट इतना की बन जाए 8 बार KGF 2

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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