उत्तर प्रदेश

राहुल-अखिलेश साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस : मायावती पर नरम, BJP पर गरम


लखनऊ यूपी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने रविवार को पहली बार जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इससे पहले दोनों नेताओं ने लखनऊ में एक दूसरे को गुलदश्ता भेंट किया और एक दूसरे को गले लगाया। दोनों नेताओं ने इस मौके पर गठबंधन सॉन्ग ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ लॉन्च किया। अखिलेश ने दावा किया कि पहली बार चुनाव से पहले ही लोगों ने विकास को गति देने का मन बना लिया है। दोनों नेताओं ने दावा किया कि एसपी-कांग्रेस गठबंधन को 300 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। इस दौरान राहुल गांधी बीएसपी पर नरम और बीजेपी पर काफी हमलावर दिखे।

एसपी-कांग्रेस गठबंधन गंगा-यमुना के मिलन जैसा: राहुल
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अखिलेश से उनके व्यक्तिगत रिश्ते हैं। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन को गंगा-यमुना का मिलन बताया। राहुल गांधी ने कहा कि क्रोध की राजनीति से देश को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यूपी के डीएनए में भाईचारा और प्यार है, क्रोध नहीं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि यूपी के युवाओं को हम विकल्प और नया रास्ता देना चाहते हैं, नई तरह की राजनीति देना चाहते हैं। हम वैचारिक समानता पर चुनाव लड़ रहे हैं।

मैं और राहुल साइकल के दो पहिए: अखिलेश

साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश और राहुल गांधी ने एक दूसरे की जमकर तारीफ की। राहुल ने जहां अखिलेश से अपने व्यक्तिगत रिश्ते का जिक्र किया, वहीं अखिलेश ने खुद को और राहुल को साइकल के दो पहिए बताया। अखिलेश ने कहा कि साइकल के साथ हाथ हो और हाथ के साथ साइकल हो तो रफ्तार बढ़ेगी ही। उन्होंने कहा कि यूपी देश को रास्ता दिखाता है, हम प्रदेश को और तेजी से आगे बढ़ाएंगे।

अमेठी और रायबरेली में गठबंधन के पेच पर गोलमोल जवाब
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से जब पूछा गया कि अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस क्या सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, तो उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ा मसला नहीं है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि यह छोटा मसला है जिसे सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मुख्य मुद्दा नहीं है, मुख्य मुद्दा बीजेपी को हराना है।

प्रियंका की भूमिका पर
राहुल गांधी से जब पूछा गया कि क्या प्रियंका गांधी पूरे प्रदेश में गठबंधन के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगी तो उन्होंने कहा कि वह हमेशा से उनकी मदद करती रही हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा, ‘प्रियंका मेरी बहन के साथ-साथ कांग्रेस की नेता हैं। वह खुद तय करेंगी कि प्रचार करेंगी या नहीं, वह हमेशा मेरी मदद करती रही हैं।’

बीएसपी पर नरम, बीजेपी पर हमलावर
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीएसपी और मायावती पर नरम रुख अपनाया लेकिन बीजेपी पर वह हमलावर दिखे। राहुल गांधी ने कहा कि वह मायावती और कांशीराम का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि बीएसपी ने अपने सरकार के दौरान गलतियां की थी लेकिन निजी तौर पर वह मायावती का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि मायवती और आरएसएस-मोदी की तुलना नहीं की जा सकती। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि मायावती और बीजेपी में बड़ा फर्क है, बीजेपी क्रोध फैलाती है, गुस्सा फैलाती है, नफरत फैलाती है जबकि मायावती की विचारधारा से देश को खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों को हराने के लिए हर धर्म के लोगों को एक साथ खड़ा होना पड़ेगा।

सूबे में हमारा काम बोल रहा है: अखिलेश
एसपी सुप्रीमो और यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि काम बोलता है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का काम बोल रहा है। अखिलेश ने कहा कि सब जानते हैं कि सरकार ने काम किया। उन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और लखनऊ मेट्रो प्रॉजेक्ट का जिक्र किया। पीएम मोदी के अच्छे दिन के नारे पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि किसी ने भी अच्छे दिन देखे हों तो बताए। उन्होंने बीजेपी पर समाजवादी पार्टी के मैनिफेस्टो की नकल करने का आरोप लगाया।

अखिलेश की नीयत साफ: राहुल गांधी
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को अपना विरोधभास नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हम भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, लेकिन वह पंजाब में बादल के साथ हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि मोदी जी कहते हैं कि वह मेक इन इंडिया चाहते हैं लेकिन इन्टेंशन नहीं है। उन्होंने कहा कि आरएसएस और बीजेपी की नीयत साफ नहीं है, जबकि अखिलेश की नीयत साफ है। राहुल गांधी ने कहा कि अखिलेश ने काम किया है, कुछ कमियां रहीं लेकिन उनकी नीयत साफ है।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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