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राहुल गांधी की PM मोदी को चिट्ठी – महिलाओं को भी दो आरक्षण

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने अपने पत्र में मानसून सत्र में महिला आरक्षण बिल लाने की मांग की है। संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई 2018 से 10 अगस्त 2018 तक चलेगा। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा है कि कांग्रेस संसद में महिला आरक्षण बिल का समर्थन करेगी। राहुल गांधी ने कहा है कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि यह बिल जल्द ही पास हो जाए, जिससे 2019 आम चुनाव में महिलाओं की भागीदारी सार्थक हो सके।

माना जा रहा है कि कांग्रेस का यह पत्र भाजपा के तीन तलाक विधेयक के जवाब में दिया गया है। कहा जा रहा है कि भाजपा इस सत्र में तीन तलाक का विधेयक लाना चाहती है इसके लिए वह विपक्षी दलों से समर्थन की मांग भी कर रही है। जैसा कि हमें मालूम है कि महिला आरक्षण बिल काफी समय से लटका हुआ है। 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा के कार्यकाल में इस बिल को संसद में पेश किया गया था। 2010 में यह बिल राज्यसभा में पास भी हो गया था लेकिन बाद में लोकसभा द्वारा अटक गया था। इससे पहले सोनिया गांधी भी पत्र लिखकर इस बिल को पेश करने की बात कह चुकी हैं।

Mahila Aarakshan 1

राहुल ने लिखा, ‘जैसा कि आपको पता है, महिला आरक्षण बिल 9 मार्च 2010 को भाजपा के समर्थन से पास हुआ था। विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने इसे ऐतिहासिक बताया था। लेकिन उसके बाद जब भी कांग्रेस ने इस पर बात की तो भाजपा ने इसका विरोध किया। हालांकि 2014 में भाजपा ने इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल किया।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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