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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री को नहीं, भारत की 135 करोड़ जनता को धमकी दी है: संजय सिंह

SBT दिल्ली:आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत को दी गई धमकी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान में साफ तौर से देखा जा सकता है कि वह किस प्रकार से कह रहे हैं कि या तो भारत-अमेरिका को दवाइयां निर्यात करे, नहीं तो हम भारत के खिलाफ कार्यवाई करेंगे।   संजय सिंह ने कहा कि यह बड़ा ही निराशाजनक है कि ऐसे समय में जब भारत की 135 करोड़ जनता संकट के दौर से गुजर रही है, देश भुखमरी के कगार पर खड़ा हुआ है, लोगों की जान जा रही है, ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को धमकी देते हैं और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कड़े शब्दों में उसका जवाब देने की बजाय, भारत की सरकार अमेरिका के सामने घुटने टेकती हुई नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह धमकी केवल प्रधानमंत्री के लिए नहीं बल्कि भारत की 135 करोड़ जनता को धमकी है, भारत की संप्रभुता को धमकी है।   उन्होंने कहा कि जहां एक ओर देश कोरोना नामक संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्र में बैठी भाजपा सरकार की सोच और नीतियां समझ से परे हैं। जहां हमारा देश खुद इस महामारी से जूझ रहा है, वहां केंद्र में बैठी भाजपा सरकार 19 मार्च तक भिन्न-भिन्न देशों को सैनिटाइजर, मास्क और वेंटिलेटर निर्यात कर रही है।
जहां एक और हमारे देश  के अस्पतालों में कोरोना से लड़ने में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं, बावजूद उसके केंद्र सरकार, 31 मार्च तक सर्बिया को कई टन सर्जिकल इक्विपमेंट्स, सैनिटाइजर और वेंटिलेटर  निर्यात कर रही है।
संजय सिंह ने कहा कि क्लोरोक्वीन नामक दवा, जो विश्वभर के अब तक के शोध में कोरोना बीमारी से लड़ने में सबसे सार्थक सिद्ध हुई है, ऐसी मुसीबत की घड़ी में जब देश खुद इस महामारी से जूझ रहा है, वह दवाई अमेरिका को निर्यात करने का निर्णय बेहद ही बचकाना और आधारहीन है।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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