उत्तर प्रदेश

संभावित:बिहार का दामाद बनेगा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री, बिहार से होंगे रिश्ते प्रगाढ़

बिहार का दामाद करेगा अब युपी को आबाद’ यूपी के संभावित मुख्यमंत्री का ससुराल है भागलपुर 1 मई 1977 को हुई थी नीलम सिन्हा के साथ शादी गाजीपुर में हवन व पूजन का दौर अब से ही शुरु उत्तर प्रदेश के संभावित मुख्यमंत्री मनोज सिन्हा बिहार के दामाद हंै। उनका ससुराल बिहार के भागलपुर में ही है। 1 मई 1977 को बड़े ही धूमधाम से उनका विवाह भलपुर निवासी नीलम सिन्हा से हुआ था। मूल रुप से यूपी के गाजीपुर जिला के मोहनपुरा गांव निवासी मनोज सिन्हा का जन्म 1 अगस्त 1959 को हुआ था। 1989 से राजनीत में आए मनोज सिन्हा ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। मनोज सिन्हा एक बार पूर्व में भी इस संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुके थे। नरेन्द्र मोदी, राजनाथ सिंह सहित कई वरीय भाजपा नेताओं के चहेते मनोज सिन्हा को काफी शौम्य और शांत स्वभाव वाला पर गंभीर राजनेता माना जाता है। मनोज सिन्हा का नाम मुख्यमंत्री पद के आने की सूचना के बाद से ही गाजीपुर में अभी से ही हवन और पूजन का दौर शुरु हो गया है। काफी इमानदार छवि वाले मनोज सिन्हा के गांव में उनका खपरैल और कुछ ढलाई वाला मकान अब भी वैसा ही है जो दशकों पूर्व था। मनोज सिन्हा तीन भाई हैं। अन्य भाइयों में भी शादगी का यह आलम कि प्रतीत ही न हो कि वे किसी केन्द्रीय मंत्री और भावी मुख्यमंत्री के भाई हैं। मनोज सिन्हा को एक पुत्र और एक पुत्री है। पुत्री की शादी हो चुकी है। उनका बेटा टेलीफोन कंपनी में काम करता है। बिहार से पारिवारिक रिश्ता होने के कारण बिहार के लोगों को भी यह उम्मीद होगी कि बिहार और यूपी के बीच समाजिक, राजनीतिक व अन्य रिश्ते प्रगाढ़ बनें

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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