उत्तर प्रदेश

आज वोट देने के बाद अखिलेश का चेहरा लटका था: पीएम मोदी

फतेहपुर: यूपी के फतेहपुर की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने अखिलेश के आरोपी मंत्री गायत्री प्रजापति को लेकर समाजवादी पार्टी सरकार पर तीखा हमला किया. मोदी ने सूबे की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यहां FIR लिखवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ता है.

गायत्री प्रजापति के बहाने मोदी ने सपा-कांग्रेस गठबंन पर हमला करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि क्या सपा और कांग्रेस का गठबंधन भी गायत्री प्रजापति जितना पवित्र है.

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि आज वोट देने के बाद अखिलेश का चेहरा लटका था.

मोदी ने अपनी सरकार को गरीबों और किसानों का हमदर्द बताते हुए कहा कि जैसे ही उनकी सरकार बनेगी, पहली मीटिंग में ही किसान के कर्ज माफ कर दिए जाएंगे. मोदी ने कहा, “हमारी सरकार गरीब और किसान के लिए है. गरीब का दर्द क्या होता है, मैं भलीभांति जानता हूं.”

अखिलेश यादव पर जनता के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा है कि चौदह साल हो गये, अब उत्तर प्रदेश से विकास का वनवास भी खत्म होना चाहिए.

धार्मिक भेदभाव का भी जिक्र

अपनी रैली में मोदी ने सूबे में भेदभाव का भी जिक्र किया और सांप्रदायिक रंग के साथ इसकी मिसाल पेश की. पीएम मोदी ने कहा कि धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. मोदी ने कहा, “यूपी में भेदभाव सबसे बड़ा संकट है. ये भेदभाव नहीं चल सकता. हर किसी को उसके हक़ का मिलना चाहिए ये सबका साथ सबका विकास होता है.”

उन्होंने कहा, “अगर होली पर बिजली मिलती है तो ईद पर भी बिजली मिलनी चाहिए. भेदभाव नहीं होना चाहिए. धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए.” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर रमजान में बिजली मिलती है तो दिवाली पर भी बिजली मिलनी चाहिए. गांव में कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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