विशेष पोस्ट

प्रधानमंत्री मोदी की मुस्लिम समुदाय से अपील, कहा- रमज़ान में पहले से ज्यादा करें इबादत

SBT24.TV संवाददाता सचिन जैन नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम मन की बात (Mann Ki Baat) के दौरान देशभर की जनता को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने देश की जनता से कोरोनावायरस (Coronavirus) को लेकर बात की. साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों को रमजान (Ramadan) के दौरान ज्यादा इबादत करने के लिए भी कहा. उन्होंने कहा कि मुस्लिम पहले से ज्यादा इबादत करें ताकि दुनिया ईद से पहले कोरोनावायरस (COVID-19) के प्रकोप से मुक्त हो जाए.

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा, ”देश का हर नागरिक इस लड़ाई का सिपाही और इस लड़ाई में नेतृत्वकर्ता है. इस मुश्किल वक्त में पूरा देश एक साथ चल रहा है. सभी लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि पूरे देश में महायज्ञ चल रहा है. कोई गरीबों को खाना खिला रहा है तो कोई जरूरतमंदों की मदद कर रहा है और मुफ्त में सब्जियां दे रहा है. लोगों की इस भावना को मेरा नमन है. कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई Public driven है”
इसके साथ ही पीएम मोदी ने मास्क की जरूरत पर भी बात की. पीएम मोदी ने कहा कि अब मास्क जीवन का हिस्सा बन गए हैं क्योंकि खुद को सुरक्षित रखने के लिए फिलहाल मास्क बहुत महत्वपूर्ण हैं.
गौरतलब है कि इस्लाम कलैंडर के मुताबिक, साल का नौवां महीना रमजान का होता है. इस साल हाल ही में रमजान का यह पाक महीना शुरू हुआ है. रमजान के महीने में मुस्लिम सुमदाय के लोग रोजा रखते हैं और इबादत करते हैं. रोजा रखने के साथ सभी मुस्लिम कुरान पढ़ते हैं. माना जाता है कि रमजान के पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों को बेशुमार रहमतों से नवाजते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर, जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button