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सभी पेरेंट्स सावधान: बच्चों में बेहद अलग हैं कोरोना के लक्षण,

तबरेज आलम नोएडा ✍
चीन के वुहान से फैैले कोरोना वायरस से सारी दुनिया भयभीत है. शुरुआत में कहा जा रहा था कि बच्चों पर कोरोना वायरस का कोई असर नहीं होता. लेकिन समय बीतने के साथ-साथ न केवल बच्चों, नवजातों पर भी इसका जान’लेवा असर दिखा. कई बच्चे अब तक कोरोना वायरस की भेंट चढ़ चुके हैं. हैरानी की बात ये है कि जैसे वयस्कों और वृद्धों में कोरोना के नए-नए लक्षण देखने को मिल रहे हैं. वैसे ही बच्चों और शिशुओं में भी कोरोना वायरस के बेहद अलग लक्षण देखने को मिल रहे हैं. ऐसे में बेहद ज़रूरी है कि हर माता-पिता को इन लक्षणों के बारे में जानकारी ज़रूर हो. ब्रिटेन की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था नेशनल हेल्थ सर्विसेस ने एक अलर्ट जारी किया है जिसके मुताबिक आईसीयू में एडमिट कई ऐसे बच्चों के मामले सामने आ रहे हैं जिनके दिल में सूजन है और पेट में दर्द, उल्टी और डायरिया के लक्षण भी नज़र आ रहे हैं. एनएचएस से जुड़े डॉक्टर्स इसे फिलहाल इनफ्लेमेट्री सिंड्रोम कह रहे हैं और उनका मानना है कि इसका सीधा संबंध कोरोना वायरस से भी हो सकता है. जिन भी बच्चों में इस तरह के लक्षण देखे गए हैं उन्हें जब अस्पताल लाया गया तो उनकी हालत काफी नाजुक थी और उन्हें सीधे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा. इन सभी का कोरोना टेस्ट भी कराया गया है और इनमें से कुछ पॉजिटिव भी पाए गए हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक सभी उम्र के बच्चों में इस तरह के लक्षण नज़र आना शुरू हुआ है.
जारी अलर्ट में इन लक्षणों की तुलना शॉक सिंड्रोम या फिर कावासाकी डिसीज से की गयी है. इन दोनों के ही लक्षणों में शरीर के भीतरी अंगों में सूजन आ जाती है और कोरोना के लक्षणों की ही तरह बुखार आ जाता है और सांस लेने में भी काफी परेशानी होती है. फिलहाल डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों में कोरोना और कावासाकी के मिले जुले लक्षण है जो कि असामान्य बात है और इसकी जांच की जा रही है. विशेषज्ञों के मुतबिक जब तक सही वजह पता न चल जाए किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. पीडियाट्रिक इंटेनसिव केयर सोसायटी के एक ट्वीट के मुताबिक, बच्चों में शॉक सिंड्रोम, कावासाकी डिसीज और कोविड-19 तीनों के गंभीर लक्षण बच्चों में एक साथ दिख रहे हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, बच्चों के पेट में दर्द होना यह एक तरह की इमरजेंसी है. एनएचएस के डॉक्टर्स ने अलर्ट जारी कर बताया है कि अब ऐसे केस नजर आते हुए तीन हफ्ते बीत गए हैं. ब्रिटेन में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर है और ऐसा भी हो सकता है कि ये इस वायरस का ही कोई प्रकार हो या फिर बच्चों को अलग तरह से नुकसान पहुंचा रहा हो. ब्रिटेन के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एलिजाबेथ विटेकर का कहना है कि ऐसे ही मामले दूसरे देश इटली और स्पेन में भी देखे गए थे, हालांकि उनकी संख्या काफी कम थी.
अभी तक कोरोना के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, सूखी खांसी ही शामिल किये गए थे. हालांकि बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि डायरिया, पेट में दर्द भी कोरोना संक्रमण के लक्षण हैं. उधर अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, गंध या स्वाद महसूस न होना भी कोरोना संक्रमण का संकेत है. लेकिन बच्चों में ये लक्षण कावासाकी डिसीज़ के लक्षणों के साथ दिख रहे हैं. कावासाकी डिसीज़ शरीर में रक्त प्रवाह के लिए जिम्मेदार नसों से जुड़ी एक बीमारी है जिसमें नसों की दीवारों पर सूजन आ जाती है. यह सूजन हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को कमजोर कर सकती है. इसके ज्यादातर मामले 5 साल से कम उम्र के बच्चों में सामने आते हैं. हालात नाजुक होने पर हार्ट अटैक या हार्ट फेल्योर भी हो सकता है. बुखार आना, स्किन पर चकत्ते दिखना, हाथों में सूजन होना, आंखों के सफेद हिस्सों में लालिमा दिखना और गले में सूजन होना इसके लक्षण हैं. डॉ. एलिजाबेथ विटेकर का कहना है, ऐसे मामलों की संख्या कम है लेकिन नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. पीडियाट्रिक इमरजेंसी रिसर्च के चेयरमैन डॉ. रोलैंड के मुताबिक, हर उस बच्चे को ख’तरा है जो पेट के दर्द से जूझ रहे हैं.

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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