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“भारत बंद” – जाने दलित एक्ट पे विवाद- राजस्थान में 1 और मध्य प्रदेश में 4 की मौत

कई दलित संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में संशोधन करने के खिलाफ देशव्यापी शटडाउन, एक ‘भारत बंद’ के लिए बुलाया है, जो कानून में कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को कम करता है। हालांकि, विरोध प्रदर्शन जल्द ही एक गंभीर मोड़ ले लिया, द्वारा की गयी हिंसा को दबाने क लिए पुलिस का सहारा लिया जा रहा है।

मध्य प्रदेश

हिंसक प्रदर्शन के बाद ग्वालियर और मोरेना के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगाया गया था, जिसमें पांच लोग मारे गए थे। धारा 144 को सागर में लागू किया गया था। आंदोलनकारियों ने भिंड में पत्थर बाजी की ।

उत्तर प्रदेश

मेरठ प्रदर्शनकारियों द्वारा की गई तोड़फोड़ और आग जनी की गई पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की पिटाई की भारत बंद ने भयंकर रूप लिया है और जल्द ही आगरा और आसपास के इलाकों में फैल विरोध प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शांति बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों से अपील की और शांति से सरकार को अपनी चिंताओं को आगे बढ़ाया।

“केंद्र और राज्य सरकारें पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण के प्रति समर्पित हैं। मैं कानून और व्यवस्था को परेशान नहीं करने के लिए सभी से अपील करता हूं। अगर सभी में कोई समस्या है, तो आप उन्हें सरकार के नोटिस में ला सकते हैं” एएनआई।

बिहार और झारखंड

बांबे का प्रभाव फोर्ब्सगंज और सोनापुर में भी महसूस किया गया, जहां प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनों को रोक दिया था। रांची में, आंदोलनकारियों ने पुलिस कर्मियों के साथ किया टकराव, भीड़ को भागने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज की।

राजस्थान

अलवर में पुलिस की गोलीबारी में एक युवा की मृत्यु हो गई और इस क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक को रोक दिया और जयपुर में एक ट्रेन को रोका। एक कपडे शोरूम में भी तोड़फोड़ किया गया, एएनआई ने बताया। कई सार्वजनिक संपत्ति क्षतिग्रस्त कर दी गयी और बाड़मेर में प्रदर्शनकारियों ने कारों  को आग भी लगा दी।

हरियाणा और पंजाब

पंजाब के जालंधर, होशियारपुर, रोपीर, भटिंडा, अमृतसर और फिरोजपुर में दलितों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि राज्य सरकार ने शैक्षिक संस्थानों, निलंबित बस सेवा, और मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी को बंद करने का आदेश दिया था।

हरियाणा के अंबाला और रोहतक और चंडीगढ़ की आम राजधानी में भी विरोध प्रदर्शन किया गया। सेना और अर्धसैनिक बलों को किसी भी संकट से बचने के लिए स्टैंडबाय पर रहने के लिए कहा गया है।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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