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छह दिन में ‘मुंज्या’ ने निकाला बजट, 30 करोड़ के पार हुई शरवरी वाघ की फिल्म

Munjya Box Office Collection Day 6: शरवरी वाघ और अभय वर्मा की फिल्म ‘मुंज्या’ का दबदबा थिएटर्स में बना हुआ है. 7 जून को वर्ल्डवाइड रिलीज हुई ये हॉरर-कॉमेडी फिल्म का खौफ दर्शकों को रास आ रहा है. तभी तो फिल्म ने महज 6 दिन में अपना बजट निकाल लिया है और 30 करोड़ क्लब में एंट्री ले ली है.

सैकनिल्क की रिपोर्ट की मानें तो ‘मुंज्या’ ने पहले दिन 4 करोड़ रुपए कमाए थे. दूसरे दिन फिल्म ने 7.25 करोड़ और तीसरे दिन 8 करोड़ रुपए का शानदार कलेक्शन किया. चौथे दिन भी फिल्म 4 करोड़ और पांचवें दिन भी 4.15 करोड़ का बिजनेस करने में कामयाब रही. अब ‘मुंज्या’ के छठे दिन के कलेक्शन के शुरुआती आंकड़े सामने आ गए हैं.

छठे दिन ‘मुंज्या’ ने किया इतना कलेक्शन
‘मुंज्या’ ने छठे दिन अब तक कुल 3.75 करोड़ रुपए बटोर लिए हैं. इसी के साथ फिल्म ने 30 करोड़ क्लब में भी एंट्री ले ली है. घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ‘मुंज्या’ का अब तक का कुल कलेक्शन 31.15 करोड़ रुपए हो गया है.

‘मुंज्या’ का डे-वाइज कलेक्शन











दिन कलेक्शन
Day 1  ₹ 4 करोड़
Day 2  ₹ 7.25 करोड़
Day 3  ₹ 8 करोड़
Day 4  ₹ 4 करोड़
Day 5  ₹ 4.15 करोड़
Day 6  ₹ 3.75 करोड़
कुल ₹ 31.15 करोड़

फिल्म ने 6 दिन में निकाला बजट
बता दें कि अपने 6 दिनों के दमदार कलेक्शन के साथ शरवरी वाघ और अभय वर्मा की फिल्म ने अपना बजट निकाल लिया है. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म का बजट सिर्फ 30 करोड़ रुपए ही है. जबकि फिल्म ने अब तक 31.15 करोड़ रुपए का बिजनेस कर लिया है.

वर्ल्डवाइड भी दमदार कलेक्शन
आदित्य सरपोटदार के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘मुंज्या’ घरेलू बॉक्स ऑफिस ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में भी खूब कमा रही है. शरवरी वाघ और अभय वर्मा स्टारर इस फिल्म ने 5 दिनों में वर्ल्डवाइड 34.25 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है. 

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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