उत्तर प्रदेश

मेरठ: मौलवी के साथ मस्जिद के कमरे में मिली स्कूल ड्रेस पहने लड़की, मचा बवाल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में सोमवार को एक लड़की के स्कूल ड्रेस में मौलवी के पास देखे जाने को लेकर हंगामा मच गया। मौलवी को लड़की के साथ मस्जिद के एक कमरे में देखा गया। हालांकि पुलिस ने माहौल बिगड़ने से बचा लिया। पुलिस के मुताबिक स्कूल ड्रेस पहने लड़की को स्वामी पाडा, बुढ़ाना गेट के पास कुछ स्थानीय लोगों ने मौलवी के कमरे में देख लिया था। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां पर एकत्र हो गए और इसका विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान सांप्रदायिक नारे भी लगाए गए। विवाद बढ़ता देखा मौलवी लड़की को छोड़कर मस्जिद के पीछे के गेट से भागने की कोशिश करने लगा। घटनी की जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद पुलिस ने किसी तरह से मौलवी को वहां से बाहर निकाला।

आईएएनएस के मुताबिक मौलवी को लड़की के साथ देखे जाने पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और धार्मिक नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और मौलवी को हिरासत में लिया। मौलवी को कोतवाली पुलिस थाने भेज दिया गया। इस दौरान विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे लोगों की पुलिस से झड़प भी हुई। भीड़ से निपटने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने लाठी लेकर एकत्रित भीड़ को मौके से खदेड़ा। घटना की जानकारी मिलने के बाद कुछ स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने भी मौके पर पहुंचे गए, लेकिन पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कर दिया।

कोतवाली में मौलवी के समर्थन में शहर काजी के साथ ही शहर नायाब भी पहुंचे। पुलिस को मौलवी को मस्जिद के पीछे वाले गेट से बाहर निकालकर कोतवाली भेजा और नाबालिग लड़की को उसके घर भेजा दिया।

 

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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