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कोरोना महामारी के कठिन काल में एम्स जोधपुर के कई ठेका सुरक्षा कर्मी बेरोजगारी की कगार पर

ब्रिजेश बडगुजर कार्यकारी संपादक
जोधपुर, 01 मई 2021, केन्द्रीय सरकार के अधीन आने वाले एम्स अस्पताल में कोर सिक्योरिटी सर्विसेज के टेन्डर के अधीन करीबन 450 ठेका सुरक्षा कर्मी कार्यरत है, इस कठिन काल में इन कोरोना वारियर्स ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा की है | पीसीसी सचिव सचिन सर्वटे ने बताया कि इन ठेका सुरक्षा कर्मियों के शिष्टमंडल ने उनसे भेंटकर जानकारी दी कि वे पिछले कई वर्षो से एम्स जोधपुर में कार्यरत है और अब जबकि कोरोना महामारी ने देश ही नहीं पूरी दुनिया का हाल बेहाल कर रखा है, ऐसे में नई कम्पनी एस.आई.एस. सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज इण्डिया लिमिटेड कम्पनी को टेंडर देने का हवाला देकर कई गार्डो को नौकरी से हटाने की तैयारी की जा रही है | सुरक्षा कर्मियों ने सरवटे को ज्ञापन देकर मदद की गुहार लगाईं | सरवटे ने बताया कि तथ्यों का अध्ययन करने के बाद उन्हें ज्ञात हुआ कि कई सुरक्षा कर्मी जिनका कोर सिक्योरिटी सर्विसेज में सेवाए देते हुवे पांच साल पूर्ण होने में मात्र तीन माह घट रहे है, उनकी सेवाओं को 30 अप्रेल को समाप्त कर दिया गया जिससे उन प्रत्येक सुरक्षा कर्मियों को मिलने वाली करीबन तीस-चालीस हजार की ग्रेच्युटी से हाथ धोना पड़ा | सर्वटे ने बताया कि कोर सिक्योरिटी सर्विसेज का टेन्डर एम्स प्रशासन द्वारा जुलाई 2016 से तीन साल तक एक्सटेंड होता रहा और 2018-19 में नया टेंडर आया किन्तु REXCO नाम की कम्पनी ने उस पर राजस्थान उच्च न्यायलय में रीट 17942/2019 के द्वारा स्टे ले लिया जिसको हाल ही में माननीय न्यायाधीश विजय बिश्नोई ने जनवरी 2021 को वेकेट करने का आदेश दे दिया | सरवटे ने बताया की वे एम्स उपनिदेशक नैनाराम बिश्नोई से भी मिले और टेन्डर ऑर्डर माँगा पर उपनिदेशक ने उन्हें RTI द्वारा लेने की हिदायत दी, सुरक्षा कर्मी इस बात पर सवाल उठा रहे है कि स्टे वेकेंट होने के करीबन एक माह बाद एम्स जोधपुर में फाइनेंसियल कमिटी की मीटिंग 06-02-2021 को हुई और उसमे सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इण्डिया) लिमिटेड कम्पनी को टेन्डर स्वीकृत किया गया और फिर उसके बाद भी करीबन 02 माह तक कोर सिक्योरिटी सर्विसेज को एम्स जोधपुर 30 अप्रेल 2021 तक एक्स्टेंशन देता रहा तो अब कोरोना संकट के समय जबकि सुरक्षा कर्मियों के ग्रेच्युटी के हकदार होने में मात्र तीन माह घट रहे है तब क्यों नहीं यह एक्स्टेंशन दिया जा रहा है | नई कम्पनी को टेन्डर देने से अचानक कई सुरक्षा कर्मियों के सामने बेरोजगारी का संकट उत्पन्न हो गया है

जबकि केंद्र व राज्य सरकार ने समय समय पर कोरोना के कठिन समय में कर्मियों को नौकरी से ना निकालने का नोटिफिकेशन जारी किया है साथ ही यह भी गौरतलब है कि एस.आई.एस. सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज इण्डिया लिमिटेड कम्पनी के संस्थापक आर के सिन्हा जो खुद एक बड़े नेकदिल समाजसेवी है, भाजपा के कद्दावर नेता, पत्रकार व राज्यसभा के सांसद रहे है फिर कैसे इस महानायक की कम्पनी के लोगो द्वारा आवेदन पत्र के 250/- रु और दस हजार रूपये की डीडी इन गरीब सुरक्षा कर्मी से ले रहे है जो बेचारे कर्ज लेकर ला रहे है और कुछ की हाईट व वजन के कारण छंटनी की जा रही है जिससे कई सुरक्षा कर्मी मायूस, बेबस और मानसिक पीड़ा से गुजर रहे है | सर्वटे ने कहा की एम्स जोधपुर चाहे नई कम्पनी को टेंडर दे इससे उन्हें आपत्ति नहीं है मगर इस वक्त जबकि महामारी से मानसिक, आर्थिक रूप से हालात खराब है तब तक पुरानी कम्पनी के टेन्डर सर्विस को तीन माह के लिए बढाया जाना चाहिए ताकि कई कर्मचारी ग्रेच्युटी के हकदार हो सके | सरवटे ने कहा की सुरक्षा कर्मियों ने एम्स जोधपुर के 2018-19 के टेंडर को अवेध बताया क्योंकि उसमे अधिकतम उम्र 50 वर्ष मांगी गयी है जबकि नियमानुसार वांछित आयु 18 से 65 वर्ष होती है और जिस कम्पनी को टेन्डर दिया गया है उसके नाम में इंटेलिजेंस शब्द आने से वह भी खारिज करने योग्य है क्योंकि ये दोनों स्थितिया पसारा एक्ट का उलंघन करती है | इस सम्बन्ध में सरवटे ने इमेल के माध्यम से प्रधानमंत्री, श्रम मंत्रालय, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन, जोधपुर सांसद व केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत सहित कई गणमान्य लोगो को अवगत करवाया एवं एम्स निदेशक से चर्चा करने उनके कार्यालय दो बार गए, मिलने हेतु इमेल द्वारा समय भी माँगा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और अब वंचित सुरक्षा कर्मियों ने माननीय न्यायालय की शरण लेने पर विचार कर रहे है |

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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