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लॉकडाउनः बिना पास नहीं चलेंगे निजी वाहन, राशन-सब्जी लाने पर भी पाबंदी, जानें क्या-क्या नियम होंगे लागू

पटना. कोरोना वायरस के मद्देनजर लागू लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए बिहार परिवहन विभाग की आज महत्वपूर्ण बैठक हुई. क्राइसिस मैनेजमेंट को लेकर हुई बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए. इसमें मुख्य सचिव दीपक कुमार और परिवहन सचिव संजय अग्रवाल मौजूद थे. विभाग ने लॉकडाउन बढ़ने की संभावना के मद्देनजर नियमों का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है.

1- सरकारी वाहन एवं आपातकालीन सेवा में संलग्न वाहनों को छोड़कर अन्य निजी वाहन बिना किसी आपातकालीन कारण या पास के नहीं चलेंगे.

2- निजी वाहनों से यदि कार्यालय, बैंक, अस्पताल एवं अन्य अनुमति प्राप्त संस्थान एवं दुकान व कार्यस्थल पर जाना जरूरी हो, तो ऐसे सभी वाहनों के लिए पास जारी किए जाएं.

3- आवश्यक सेवा एवं पास प्राप्त दोपहिया वाहनों के अतिरिक्त मोटरसाइकिल या स्कूटी पर डबल राइड अनुमान्य नहीं होगा.

4- पास प्राप्त कार (विधि व्यवस्था एवं आपातकालीन कार्यों में लगे वाहनों को छोड़कर) पर ड्राइवर के अतिरिक्त अधिकतम 2 व्यक्तियों को बैठने की अनुमति होगी.

5- निजी वाहन (मोटरसाइकिल, कार आदि) से सब्जी, दूध, फल, राशन आदि खरीदने के लिए जाने की अनुमति नहीं होगी.

6- पास में प्रस्थान स्थल एवं गंतव्य स्थल का स्पष्ट उल्लेख किया जाना जरूरी है. पास के पीछे चेकिंग के लिए एक लाॅगबुग प्रिंट कराया जाए, जिसमें पुलिस द्वारा चेकिंग के समय तिथि, स्थान एवं समय अंकित कर पुलिस पदाधिकारी अपना हस्ताक्षर करेंगे.

7- चेकिंग के दौरान बिना उचित आधार के घूमते पाए जाने पर मोटरयान अधिनियम की धारा- 177, 179, 197, 202 के तहत कार्रवाई की जाएगी. विशेष परिस्थिति में वाहन जब्त भी किया जा सकेगा. वाहन चालक एवं अन्य सवारी मास्क का प्रयोग अवश्य करेंगे. सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखेंगे.

8- बिना मास्क के पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा. इस बाबत परिवहन सचिव ने बताया कि बिना मास्क पहने ड्राइवर व सवारी के किसी भी वाहन को पेट्रोल, डीजल की आपूर्ति नहीं की जाएगी. पेट्रोल पम्प के कर्मी भी मास्क का प्रयोग करेंगे. साथ ही पेट्रोल पम्प पर सेनेटाइजर की भी व्यवस्था कराने को कहा गया है.

 

 

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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