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लेनिन की मूर्ति को नही लोकतंत्र को कुचल रही है सत्ता दल

भारत तेजी से बदल रहा है आर्थिक रूप से नही सामाजिक रूप से as a socity शायद हम fail हो रहे है ओर अपनी सोच को धीरे धीरे संकरा करते जा रहे है वैसे तो हम अपनी अनेकता मे एकता वाले देश के रूप मे जाने जाते थे पर धीरे धीरे ये चीज़े धूमिल होती जा रही है शायद हम हिंदुस्तान ओर हिंदुस्तानियत को मिटाने पे उतारू हो गये है ओर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हमे त्रिपुरा के चुनाव के परिणाम के आने के बाद देखने को मिला जैसे अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया तो उसने बामियान में बुद्ध की मूर्ति तोड़ दी। ठीक वैसे ही bjp त्रिपुरा में सत्ता में आयी तो उन्होंने लेनिन की मूर्ति तोड़ दी।

शायद वो भूल गये है की उन्हें जनादेश काम करने के लिए मिला है। मूर्तियाँ तोड़ने के लिए नहीं। शायद वो ये समझ नही पा रहे है की हिंदुत्व, झूटी देशभक्ति ओर उन्माद देश को एक भयवाह गृह युद्ध की तरफ धकेल देगा । या हो सकता है की उनकी चाहत ही यही हो , हलाकि प्रधानमंत्री ने इस पे अपनी चिंता जहीर की हे और इस घटना को दुखद बताया है लेकिन आगे इस तरह की घटना न हो और इस तरह की मानसिकता पे अंकुश लग सके ये जिम्मेदारी भी सत्ताधारी दल की बनती है I

विचारक :-
आकाश गिरी

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