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गूगल से ट्रांसलेट करने वालों को बड़ा झटका, कर दी अपनी सर्विस बंद!

Google in China:  दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन Google ने चीन में गूगल ट्रांसलेशन (Google Translation) सर्विस को बंद कर दिया है. इससे पहले गूगल ने अपने प्रोडक्ट्स की मैन्यूफैक्चरिंग चीन से दूसरे देशों में शिफ्ट की थी. उसके बाद अब गूगल ट्रांसलेट सर्विस ही बंद कर दी है. बता दें चीन ने ज्यादातर देशों की सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली ज्यादातर सेवाओं पर प्रतिबंध लगा कर रखा है. गूगल ट्रांसलेट चीन में गूगल द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली चुनिंदा सेवाओं में से एक था, जिसे अब बंद कर दिया गया है. 

क्यों किया गया बैन 

जारी रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में अमेरिकी टेक कंपनी ने ट्रांसलेशन सर्विस को कम इस्तेमाल किए जाने के कारण बंद कर दिया है. चीन में ट्रांसलेशन वेबसाइट खोलने पर अब एक सामान्य ‘सर्च बार’ और ‘लिंक’ नजर आता है, जो क्लिक करने पर उन्हें हांगकांग में उपलब्ध कंपनी के वेबपेज पर ले जाता है. यह वेबपेज चीन में प्रतिबंधित है.

चीन के कई उपयोगकर्ताओं ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शनिवार से ही ‘गूगल ट्रांसलेट’ सेवा के इस्तेमाल न कर पाने की जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि गूगल के क्रोम ब्राउजर में उपलब्ध अनुवाद फीचर भी अब चीन में काम नहीं कर रहा है.

गूगल ने 2017 किया था लांच

गूगल ने एक बयान जारी कर कहा कि चीन में ‘कम इस्तेमाल’ के कारण ‘गूगल ट्रांसलेट’ सेवा बंद कर दी गई है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चीन में कितने उपयोगकर्ता ‘गूगल ट्रांसलेट’ सेवा का इस्तेमाल करते थे. गूगल ने 2017 में चीन के अंदर ट्रांसलेशन ऐप लॉन्च किया था. चीनी यूजर्स को रिझाने के लिए कंपनी ने मशहूर चीनी-अमेरिकी रैपर एमसी जिन से एड भी कराया था.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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