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कुणाल बैद युवा मंच” ने किये जनता को जीवनदान देनेवाले कार्य

ब्रिजेश बडगुजर कार्यकारी संपादक
“पिंपरी चिंचवड़ महानगरपालिका” पिंपरी स्थित जीजामाता रुग्णालय के सहकार्य से “कुणाल वेद युवा मंच” की टीम द्वारा अब तक तकरीबन 5000 लोगों ने कोरोना वैक्सीन का लाभ उठाया है,”कुणाल बैद युवा मंच” द्वारा “जब से करोना महामारी आई है,तब से जन-जन को राहत पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है,जिसमें प्रमुख रुप से राशन वितरण करना,मास्क वाटप करना,सैनिटाइजर बांटना और लोगों को कारोना के प्रती जागरुक करना जैसे कार्य किए गए”.
यहां पर जीजामाता रुग्णालय के सहकार्य से “पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका” में मिलिंद नगर स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर में पिछले डेढ़ महीने से जनता को कोरोना वैक्सीन दी जा रही है जिसमें
अस्पताल की टीम का अहम योगदान है,


मुख्य रुप से तिरूमनी मैडम, वैदपाठक मैडम,कविता शिरशाठ मैडम,संतोष शिंगाडे सर,रोहिणी लोखंडे मैडम,डाटा ऑपरेटर :शर्मीन शेख, पूजा राउत और अस्पताल की टीम द्वारा अब तक 5000 लोगों ने वैक्सीन का लाभ उठाया है,
इसमें कुणाल बैद युवा मंच की टीम के सहकारी राजू परदेशी ,राजु खैरे, मोहन बिडलान, सोनाथ बैद, ज्ञानचंद बैद, मोहन बैद, विरपाल डिंगिया, रोहिदास कुड़िया, राकेश राजोरिया, धनपत भेनवाल, सुनिल टाक, मदनपाल टाक, मेघराज सौदे, कृष्णा चटोले, विनोद हड़ालिया, दिपक कांबले, पवन डिंगिया, नरेंद्र टाक, राजेश बडगूजर, राजेश कल्याणी, गणेश कल्याणी, विजय सौदे, प्रदीप मारोठिया, अनिल पारचा, रवि कजनिया, मनोज करोतिया, चंदन परचा, राकेश सौदे, सुनिल चिकने, सागर आठवले, रोहन कल्याणी, प्रदीप चावरिया, रजत डिंगिया, अक्षय जगताप, सलमान खान, गुलशन बैद, रोहित साठे, गजानन संधू, कुणाल भोसले, विशाल शिंदे, सुमित जगधने, विकी परदेशी, सोनू सूर्यवंशी, आकाश माने, मोहन कांबले, रोहित परदेशी, नईम खान, धर्म सिलेलान, रोहित लोट का समावेश है

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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