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स्टूडेंट की नैया को पार लगाएंगे ‘जीतू भैया’, ‘कोटा फैक्ट्री 3’ का ट्रेलर रिलीज

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर काफी पॉपुलर हुई वेब सीरीज ‘कोटा फैक्ट्री’ की तीसरे सीजन का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। मेकर्स ने ‘कोटा फैक्ट्री 3’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया है। जितेंद्र कुमार की वेब सीरीज ‘कोटा फैक्ट्री 3’ का ट्रेलर देखकर लोग एक्साइटेड हो गए हैं और इसकी रिलीज का इंतजार कर रहे हैं। वेब सीरीज के ट्रेलर को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि जितेंद्र कुमार एक बार फिर इम्प्रेस करने वाले हैं। आइए देखते हैं कि वेब सीरीज ‘कोटा फैक्ट्री 3’ में क्या खास दिखाया गया है। बताते चलें कि जितेंद्र कुमार की वेब सीरीज ‘कोटा फैक्ट्री 3’ 20 जून से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होने वाली है।

‘कोटा फैक्ट्री 3’ में छा गए जीतू भैया

नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘कोटा फैक्ट्री’ के पहले और दूसरे सीजन को काफी पसंद किया गया है। अब इस वेब सीरीज के तीसरे पार्ट यानी ‘कोटा फैक्ट्री 3’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। इस वेब सीरीज के ट्रेलर में जितेंद्र कुमार ने फिर इम्प्रेस किया है। ट्रेलर की शुरुआत जीतू भैया के इंटरव्यू से होती है और वह कहते हैं, ‘हमें सक्सेसफुल सेलेक्शन के साथ ही सक्सेसफुल प्रेपरेश को भी सेलिब्रेट करना चाहिए। जीत की तैयारी नहीं, तैयारी ही जीत है भाई।’ इसके अलावा जीतू भैया के किरदार में जितेंद्र कुमार के कई डायलॉग लोगों के दिल में उतर जाते हैं। वह कहते हैं, ‘हम भूल जाते हैं कि आईआईटी-जी के ये एस्पिरेंट्स असल में सिर्फ 15-16 साल के बच्चे हैं। उनकी अपनी फीलिंग्स है, अपनी आदते हैं, अपनी चाहते हैं।’ वहीं, ट्रेलर में दिखाया जाता है कि कोटा में बच्चे अपनी पढ़ाई की तैयार में लगे हैं और उनका एक लक्ष्य होता है कि आईआईटी में सेलेक्शन हो जाए।

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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