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कारगिल विजय दिवस: वीर अमर जवानों के बलिदान को आज याद कर रहा है पूरा देश!

नई दिल्ली : 1999 में दुश्मन देश को धूल जटाकर अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों की याद में पूरा देश कारगिल विजय दिवस माना रहा है। द्रास वॉर मेमोरियल में लोगों ने 1999 के कारिगल युद्ध में शहीद जवानों को श्रृद्धांजलि अर्पित की। आज उनके साहस व बलिदान की गाथा को याद किया जा रहा है।

26 जुलाई 1999, आज भी इस दिन को याद कर सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है, तो वहीं कारगिल विजय में शहीद जाबाजों को याद कर आखें भी नम हो जाती हैं। ऑपरेशन विजय के तहत देश के वीर सपूतों ने  अपनी जान की बाजी लगाकर कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर विजय हासिल की। इनमें आगरा के भी सात सपूत थे, जो देश पर प्राण न्योछावर कर गए। इन वीर योद्धाओं के गांव और कस्बों में आज भी उनकी वीरता की कहानियां सुनाई देती हैं। कारगिल की चोटी पर पाकिस्तानी सेना को प्रदर्शन कर तिरंगा लहराने वाले हमारे वीर जवानों को आज पूरा देश याद कर रहा है।

शहीदों को श्रद्धाजंलि

क्या आप नायक अहमद अली, नायक आजाद सिंह, सिपाही विजेंद्र सिंह को जानते हैं? शायद नहीं। ये तीनों भारत मां के वो सपूत है, जिन्होंने जंग-ए-कारगिल फतह करने के लिए अपनी जान दे दी। जब पूरे मुल्क में पाकिस्तान को हराकर कारगिल फतह की खुशी मनाई जा रही थी, तो इनके घरों में मातम का माहौल था। आंखों में आंसू थे, लेकिन दिल में तसल्ली थी। बेटा देश के लिए कुर्बान हो गया। भारत मां के सपूत ने मिट्टी का हक अदा कर दिया। आज भी अपने सपूतों को याद कर उनके घर वाले गमगीन हो जाते हैं, लेकिन फक्र से कहते हैं कारगिल में शहीद हुआ है मेरा लाल। देश पर मरने को हर किसी को नसीब नहीं होता है। तिरंगे का हर कोई कफन नहीं पहनता है।

विजय दिवस पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर शहीदों को याद किया। उन्होंने कहा, ‘कारगिल विजय दिवस पर हम उन सभी सैनिकों के साहस और सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं, जो 1999 में बहादुरी से लड़े। हर भारतीय को उनकी वीरता और साहस पर गर्व है।’

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