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‘चंद्रमुखी’ के रोल में ऑडियंस को डराएंगी कंगना रनौत, नई फिल्म का हुआ ऐलान

Kangana Ranaut Chandramukhi 2: बॉलीवुड की क्वीन यानी कंगना रनौत (Kangana Ranaut) नई फिल्म चंद्रमुखी 2 (Chandramukhi 2) में नजर आएंगी. लायका प्रोडक्शन हाउस ने इसकी अनाउंसमेंट कर दी है. उन्होंने कंगना की एक फोटो शेयर करते हुए फिल्म से जुड़ने के लिए उनका स्वागत किया है. ‘चंद्रमुखी 2’ साल 2005 में रिलीज हुई रजनीकांत (Rajinikanth) की हॉरर-कॉमेडी ‘चंद्रमुखी’ (Chandramukhi) का सीक्वल है, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी.

फिल्म में ऐसा होगा कंगना रनौत का रोल

‘चंद्रमुखी 2’ में कंगना रनौत, राघव लॉरेंस के अपोजिट नजर आएंगी. बताया जा रहा है कि इस फिल्म में कंगना एक डांसर के रोल में दिखेंगी, जो राजा के दरबार में डांस करने का काम करती है. हालांकि, अभी तक इस फिल्म की रिलीज डेट का ऐलान नहीं किया गया है.


कंगना ने साउथ इंडस्ट्री का किया रुख

कंगना रनौत पिछले कुछ समय से साउथ फिल्म इंडस्ट्री की तरफ रुख कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता की बायोपिक ‘थलाइवी’ में काम किया था, जिसमें उनकी एक्टिंग को बहुत पसंद किया गया. हालांकि, कमाई के मामले में ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी. 

कंगना रनौत की फिल्म

बता दें कि कंगना (Kangana Ranaut) ने हाल ही में फिल्म इमरजेंसी (Emergency)  का असम शेड्यूल कंप्लीट किया है. इसका निर्देशन वह खुद कर रही हैं. ये एक पॉलिटिकल-ड्रामा फिल्म है, जो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन से प्रेरित है. जैसा कि नाम से साफ पता चल रहा है कि इस फिल्म में साल 1975 में लगी इमरजेंसी की कहानी को बयां किया जाएगा. ‘इमरजेंसी’ में कंगना, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का रोल प्ले कर रही हैं. इसके अलावा कंगना के पास कई फिल्में हैं, जो एक के बाद एक सिनेमाघरों में रिलीज होंगी. इस लिस्ट में ‘तेजस’, ‘मणिकर्णिका रिटर्न्स: द लेजेंट ऑफ दिद्दा’, ‘द इंकार्नेशन: सीता’ शामिल हैं.

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Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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