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बुलन्दशहर समाजवादी पार्टी के पूर्व लोकसभा सदस्य कमलेश वाल्मीकि जी का संदिग्ध परिस्तिथियों में निधन हो गया 28 मई को सुबह 9 बजे दाह संस्कार होगा

*वाल्मीकि समाज ने आज एक ओर अपना कोहनूर हीरा खो दिया है वाल्मीकि समाज के नाम को भारत मे चाँद तारोँ कि तरह चमकाने वाले वाल्मीकि समाज के स्तम्भ देश विदेशों में कर्मठता ईमादारी व्यवहार कुशलता वीर योद्धा के रूप में डंका बजाने बाले बुलन्दशहर के पूर्व लोकसभा सदस्य (2009-2014) तक स्वर्गीय श्री कमलेश वाल्मीकि जी का अस्कमात निधन संदिग्ध परिस्तिथियों में उनके आवास खुर्जा में हो गया है!*
*स्मरणीय रहे कि 25 मई शनिवार को सांसद जी अपनी धर्मपत्नी जी को उनके पीहर पिलखुआ छोड़कर खुर्जा वापस आ गये थे तथा रात्रि 10 बजे तक अपने भाइयों से वार्ता करके अपने घर भाइयों से अलग मकान में रहते थे रात्रि विश्राम करने के लिए चले गए दूसरे दिन 26 मई को सुबह उन्हें लखनऊ जाना था,घर परिवार के सब भाइयों ने समझा कि वह लखनऊ चले गए हैं दूसरे दिन 26 को भाइयों ने जब सांसद जी से मोवाइल से बातें कि तो वह बंद पड़ा था आज 27 को लखनऊ से सांसद स्वर्गीय श्री कमलेश वाल्मीकि जी वापस खुर्जा नहीं आये तो पूरे घर को चिंता हुई क्योंकि उनका मोवाइल पहले से बंद था एक लड़का अचानक घर मे देखा तो वह ढंग राह गया घर अंदर से बंद था और घर से बदबू आ रही थी जब किबाड़ें तोड़ीं तो देखा पूर्व सांसद मृतक पड़े थे उनके सर से खून बहकर सुख चुका था जिसके लिए पोस्ट मार्टम कराना जरूरी पड़ गया जिससे सच्चाई सामने आ सके कि उनकी मृत्यु किस कारण हुई है।*
*कल 28 मई को सुबह 9 बजे उनका आवास बुर्ज बाला मोहल्ला खुर्जा से शव यात्रा निकलेगी उसके बाद दाह संस्कार किया जाएगा, स्वर्गीय श्री कमलेश वाल्मीकि जी भारतीय मानव कल्याण महा समिती के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी थे वह अनेकों देश विदेश की सामाजिक संस्थाओं में प्रमुख रूप से जुड़कर समाज सेवा में भी भाग लेते थे जिनकी छति पूर्ति होना असंभव है वाल्मीकि समाज के वीर योद्धा थे।

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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