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जज लोया केस: नहीं होगी SIT जांच! सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकारा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विशेष सीबीआई न्यायाधीश बीएच लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग याचिकाओं के एक बैच को खारिज कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि न्यायाधीश लोया मौत के मामले में न्यायिक अधिकारियों से नास्तिकता करने का कोई कारण नहीं है और उन्होंने फैसला दिया कि जांच से पता चलता है कि वह प्राकृतिक कारणों से मर गया था। अनुसूचित जाति ने यह भी कहा कि बेवकूफ और प्रेरित याचिकाओं को निराश किया जाना चाहिए। सीबीआई न्यायाधीश उनकी मृत्यु के समय उच्च प्रोफ़ाइल सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले सुन रहे थे।

याचिका खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचुद और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर के तीन न्यायाधीशीय खंडपीठ ने याचिका के पीछे के मकसद पर सवाल उठाया और पाया कि यह न्यायिक आजादी पर हमला था।

कांग्रेस नेता तहसीन पुनावाला और महाराष्ट्र स्थित बीएस लोन द्वारा दायर किए गए अनुरोधों का एक बैच 2014 में न्यायाधीश लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग के लिए शीर्ष अदालत में दायर किया गया था।

नवंबर 2017 में लोया की मौत का मुद्दा स्पॉटलाइट के तहत आया था, क्योंकि उनकी बहन ने इसके आसपास की परिस्थितियों और कथित सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले के बारे में संदेह को बढ़ावा दिया था। लेकिन लोया के बेटे ने 14 जनवरी को मुंबई में कहा था कि उनके पिता प्राकृतिक कारणों से मर चुके हैं।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश बृजमोहन हरिकिशन लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं को खारिज करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया करते हुए कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि फैसले ने कई प्रश्नों को अनुत्तरित छोड़ दिया है और फैसले भारत के इतिहास में एक दुखद दिन है।

कांग्रेस पर पलटवार करते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बीजेपी के प्रवक्ता समित पत्रा ने जज लोया की मौत की जांच में राजनीतिक हित के मुकदमे के रूप में जांच की मांग के लिए सार्वजनिक हितों के मुकदमे का वर्णन किया और आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी इसके पीछे थीं।

कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था और राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए राष्ट्रपति से जांच की मांग करी थी, जिस पर पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी को अमित शाह, भारतीय न्यायपालिका और जनतंत्र को लक्षित करने की साजिश क लिए शर्मिंदा होकर माफ़ी मांगनी चाहिए I

Aslam Khan

हर बड़े सफर की शुरुआत छोटे कदम से होती है। 14 फरवरी 2004 को शुरू हुआ श्रेष्ठ भारतीय टाइम्स का सफर लगातार जारी है। हम सफलता से ज्यादा सार्थकता में विश्वास करते हैं। दिनकर ने लिखा था-'जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध।' कबीर ने सिखाया - 'न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर'। इन्हें ही मूलमंत्र मानते हुए हम अपने समय में हस्तक्षेप करते हैं। सच कहने के खतरे हम उठाते हैं। उत्तरप्रदेश से लेकर दिल्ली तक में निजाम बदले मगर हमारी नीयत और सोच नहीं। हम देश, प्रदेश और दुनिया के अंतिम जन जो वंचित, उपेक्षित और शोषित है, उसकी आवाज बनने में ही अपनी सार्थकता समझते हैं। दरअसल हम सत्ता नहीं सच के साथ हैं वह सच किसी के खिलाफ ही क्यों न हो ? ✍असलम खान मुख्य संपादक

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